छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अनारक्षित पद पर पदोन्नति को लेकर कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट की है। कोर्ट के अनुसार, अनारक्षित पद केवल सामान्य वर्ग के लिए तय नहीं होता।
यदि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी पात्र है, तो उसके नाम पर भी विचार होना चाहिए। यह विचार वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर किया जाना चाहिए। मामले में विभाग को डीपीसी की समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं।
अनारक्षित पद पर पदोन्नति को लेकर कोर्ट की टिप्पणी
मामला लोक शिक्षण संचालनालय में कार्यरत अलख राम ध्रुव से जुड़ा है। वह सहायक ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत थे। वह अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं।
वर्ष 2016 में सहायक अधीक्षक पद के लिए डीपीसी आयोजित हुई थी। इस प्रक्रिया में उन्हें पदोन्नति के लिए शामिल नहीं किया गया था।
ध्रुव ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका कहना था कि वह वरिष्ठ होने के बावजूद विचार से बाहर रहे।
अनारक्षित पद पर पदोन्नति के लिए पात्रता जरूरी
मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने की। कोर्ट ने अनारक्षित पद की प्रकृति को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
कोर्ट ने कहा कि अनारक्षित पद किसी एक सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं होता। पात्र आरक्षित वर्ग के कर्मचारी का नाम भी विचार में लिया जा सकता है।
इसमें वरिष्ठता और योग्यता महत्वपूर्ण आधार होंगे। इसी बिंदु को ध्यान में रखते हुए विभाग को प्रक्रिया दोबारा देखने को कहा गया है।
2016 की डीपीसी में दो पद थे उपलब्ध
वर्ष 2016 में सहायक अधीक्षक पद के लिए दो पद उपलब्ध थे। इनमें एक पद अनारक्षित था। दूसरा पद अनुसूचित जाति वर्ग के लिए था।
याचिकाकर्ता के अनुसार, एसटी वर्ग के लिए पद उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें प्रक्रिया से बाहर रखा गया। दूसरी ओर, उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों के नामों पर विचार किया गया।
वरिष्ठता सूची में अलख राम ध्रुव सुनील कुमार भूमरकर और शैलेश शर्मा से वरिष्ठ थे। इसके बावजूद दोनों कर्मचारियों के नाम पदोन्नति के लिए देखे गए।
राज्य ने डीपीसी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार बताया
राज्य की ओर से सरकारी अधिवक्ता अखिलेश कुमार ने याचिका का विरोध किया। उनका पक्ष था कि एसटी वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था।
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि दोनों उपलब्ध पद आरक्षण रोस्टर के अनुसार भरे गए। विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की गई थी।
कोर्ट के सामने दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं। इसके बाद मामले में डीपीसी की समीक्षा का निर्देश दिया गया।
विभाग को 90 दिनों में प्रक्रिया पूरी करनी होगी
कोर्ट ने विभागीय पदोन्नति समिति की समीक्षा करने को कहा है। समीक्षा में अलख राम ध्रुव के नाम पर नए सिरे से विचार होगा।
अनारक्षित पद पर पदोन्नति से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने समयसीमा भी तय की है। विभाग को पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
- मामला: सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति।
- याचिकाकर्ता: अलख राम ध्रुव।
- वर्ग: अनुसूचित जनजाति।
- मुख्य निर्देश: डीपीसी की समीक्षा।
- समयसीमा: 90 दिनों के भीतर प्रक्रिया पूरी करना।
अनारक्षित पद के लिए सभी पात्र कर्मचारियों पर विचार
अनारक्षित पद पर पदोन्नति के मामले में कोर्ट की टिप्पणी का मुख्य आधार पात्रता है। वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर पात्र कर्मचारी का नाम देखा जाना चाहिए।
इस मामले में अब विभाग को डीपीसी की समीक्षा करनी होगी। इसके बाद अलख राम ध्रुव की पदोन्नति पर दोबारा विचार किया जाएगा।
90 दिनों में सामने आएगी विभागीय कार्रवाई
अनारक्षित पद पर पदोन्नति के मामले में अब विभाग की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। डीपीसी समीक्षा के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
कोर्ट ने प्रक्रिया के लिए 90 दिनों की समयसीमा दी है। इसलिए विभाग को निर्धारित अवधि में समीक्षा पूरी करनी होगी।
मामला पदोन्नति प्रक्रिया में पात्रता और वरिष्ठता से जुड़ा है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब विभागीय समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

