करियर शुरू होने के साथ कमाई भी शुरू होती है। इस समय सही वित्तीय आदतें बनाना जरूरी है। 25 साल की उम्र में निवेश भविष्य की जरूरतों के लिए मददगार हो सकता है।
शुरुआती उम्र में निवेश का सबसे बड़ा फायदा समय है। लंबे समय तक निवेश करने पर कंपाउंडिंग का लाभ मिल सकता है। इसलिए कम उम्र में वित्तीय योजना पर ध्यान देना जरूरी है।
इसके अलावा केवल निवेश करना पर्याप्त नहीं है। बजट, बीमा और इमरजेंसी फंड भी जरूरी हैं। साथ ही कर्ज को नियंत्रित रखना चाहिए।
निवेश शुरू करने से पहले क्या करें?
सबसे पहले अपने वित्तीय लक्ष्य तय करें। इनमें घर, शिक्षा, यात्रा और रिटायरमेंट शामिल हो सकते हैं।
इसके बाद अपनी मासिक आय और खर्च लिखें। इससे बचत की सही रकम समझने में मदद मिलेगी। साथ ही गैर-जरूरी खर्चों की पहचान भी होगी।
फिर अपने लक्ष्य के अनुसार निवेश अवधि तय करें। छोटे लक्ष्य के लिए अलग योजना बनाई जा सकती है। वहीं, लंबे लक्ष्य के लिए अलग विकल्प देखे जा सकते हैं।
25 साल की उम्र में निवेश का फायदा क्या है?
कम उम्र में शुरुआत करने पर निवेश को ज्यादा समय मिलता है। यही समय कंपाउंडिंग के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
उदाहरण के लिए, दो लोग हर महीने ₹5,000 निवेश करते हैं। दोनों के निवेश पर समान अनुमानित रिटर्न मानते हैं।
अगर एक व्यक्ति 25 साल में शुरुआत करता है, तो उसकी निवेश अवधि लंबी होगी। दूसरा व्यक्ति 35 साल में शुरुआत करता है। उसके पास निवेश के लिए कम समय रहेगा।
इसलिए शुरुआती उम्र का अंतर लंबे समय में बड़ा हो सकता है। हालांकि, बाजार आधारित निवेश में रिटर्न निश्चित नहीं होता।
बजट से निवेश की राह आसान होगी
बजट बनाना वित्तीय योजना का पहला कदम हो सकता है। इससे पता चलता है कि पैसा कहां खर्च हो रहा है।
50:30:20 नियम बजट समझने का एक आसान तरीका है। इसमें आय को तीन हिस्सों में बांटा जाता है।
- 50 प्रतिशत रकम जरूरी खर्चों के लिए रखी जा सकती है।
- 30 प्रतिशत रकम इच्छाओं और जीवनशैली के लिए रखी जा सकती है।
- 20 प्रतिशत रकम बचत और निवेश के लिए रखी जा सकती है।
हालांकि, यह अनुपात सभी लोगों के लिए समान नहीं है। आय और जिम्मेदारियों के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
इसलिए अपनी स्थिति के अनुसार बजट बनाना बेहतर है। साथ ही हर महीने इसकी समीक्षा करें।
बढ़ती आय के साथ बचत भी बढ़ाएं
सैलरी बढ़ने पर खर्च बढ़ना सामान्य है। हालांकि, इससे निवेश की रकम कम नहीं होनी चाहिए।
इसी स्थिति को लाइफस्टाइल इंफ्लेशन कहा जाता है। इससे बचने के लिए आय बढ़ने पर निवेश भी बढ़ाएं।
जरूरत और इच्छा में अंतर समझना जरूरी है। इसके अलावा दिखावे वाले खर्चों को सीमित किया जा सकता है।
साथ ही हर महीने अपने खर्चों की जांच करें। इससे गैर-जरूरी खर्चों को कम करना आसान होगा।
क्रेडिट कार्ड में सावधानी जरूरी
क्रेडिट कार्ड सुविधा देता है। लेकिन इसका गलत इस्तेमाल कर्ज बढ़ा सकता है।
समय पर भुगतान नहीं करने पर ब्याज देना पड़ सकता है। इससे भविष्य की बचत प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा ज्यादा खर्च करने की आदत बन सकती है। इससे निवेश के लिए उपलब्ध रकम कम हो सकती है।
इसलिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। बकाया राशि का समय पर भुगतान भी जरूरी है।
इमरजेंसी फंड को नजरअंदाज न करें
अचानक आने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड जरूरी है। नौकरी में बदलाव या बड़े खर्च के समय यह काम आता है।
आमतौर पर 3 से 6 महीने के जरूरी खर्च का फंड रखा जा सकता है। हालांकि, जरूरत के अनुसार रकम ज्यादा भी हो सकती है।
अगर आय नियमित नहीं है, तो ज्यादा फंड रखना उपयोगी हो सकता है। पारिवारिक जिम्मेदारियों के अनुसार भी रकम तय करें।
इमरजेंसी फंड ऐसी जगह रखें, जहां जरूरत पर पैसा मिल सके। साथ ही इसे सामान्य खर्चों में इस्तेमाल न करें।
25 साल की उम्र में निवेश के साथ बीमा भी जरूरी
25 साल की उम्र में निवेश करते समय वित्तीय सुरक्षा पर भी ध्यान दें। हेल्थ इंश्योरेंस अचानक होने वाले मेडिकल खर्च में मदद कर सकता है।
जरूरत होने पर टर्म इंश्योरेंस पर भी विचार किया जा सकता है। इसके अलावा निवेश का विकल्प लक्ष्य के अनुसार चुनें।
जोखिम लेने की क्षमता को भी समझना जरूरी है। बाजार में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर फैसला करें।
निवेश और इमरजेंसी फंड में अंतर समझें
इमरजेंसी फंड का उद्देश्य अचानक खर्चों को पूरा करना है। दूसरी ओर, निवेश लंबे समय के लक्ष्यों के लिए किया जाता है।
इसलिए दोनों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। इमरजेंसी फंड आसानी से उपलब्ध होना चाहिए।
वहीं, निवेश का समय लक्ष्य के अनुसार तय किया जा सकता है। इससे वित्तीय योजना ज्यादा व्यवस्थित रहती है।
25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने से लंबे समय का फायदा मिल सकता है। हालांकि, नियमितता और धैर्य बनाए रखना जरूरी है।
आय बढ़ने पर निवेश की रकम भी बढ़ाई जा सकती है। साथ ही समय-समय पर अपने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें।

