आज छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ हरेली पर्व आयोजन की धूम पूरे राज्य में देखने को मिली, और राजधानी रायपुर का सीएम हाउस इस उत्सव का केंद्र रहा।
सावन माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह पर्व कृषि और हरियाली का प्रतीक माना जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने परिवार के साथ पारंपरिक रीति से कृषि उपकरणों की पूजा की और प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की शुरुआत रामायण पाठ से हुई, जिसमें राज्य के मंत्री, विधायक और गणमान्य नागरिक भी शामिल हुए।
छत्तीसगढ़ हरेली पर्व आयोजन के तहत पारंपरिक गेड़ी नृत्य, लोकगीत, और सावन झूला प्रमुख आकर्षण रहे।
मुख्यमंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने गेड़ी चढ़कर उत्सव में भाग लिया, जिससे माहौल और भी जीवंत हो गया।
हरेली केवल किसानों का पर्व नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है।
सीएम हाउस में सजे झूलों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं से जोड़ा।
छत्तीसगढ़ हरेली पर्व आयोजन के माध्यम से प्रदेश में पारंपरिक जीवन मूल्यों को बढ़ावा देने की पहल की गई।
इस आयोजन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने हिस्सा लिया, जिससे सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश मिला।
आयोजन स्थल को पारंपरिक झांकियों, हरियाली, और देसी सजावट से सजाया गया था, जिसने लोक परंपरा को जीवंत कर दिया।
मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में पर्यावरण-संरक्षण, जैविक खेती और लोक संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
हरेली तिहार पर सीएम हाउस में यह आयोजन पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बना, जो बताता है कि परंपरा को अपनाकर हम भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।
छत्तीसगढ़ हरेली पर्व आयोजन न केवल सांस्कृतिक गौरव है, बल्कि यह एकता और लोक चेतना का पर्व भी है।
इस बार का आयोजन भविष्य में और विस्तृत रूप ले सकता है, क्योंकि इससे नई पीढ़ी भी अपनी संस्कृति को पहचानने लगी है।
हरेली तिहार हर साल इसी उत्साह के साथ मनाया जाए, इस भावना के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
