उत्तर भारत में लगातार हो रही बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरनाक बना दिया है। इसी कारण भारत ने पाकिस्तान को तवी नदी जलस्तर पर नया अलर्ट भेजा है। यह चेतावनी लगातार तीन दिनों में तीसरी बार भेजी गई, जिससे हालात की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
केंद्र सरकार ने जानकारी दी कि कई बांधों से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। पानी छोड़ने से पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में बाढ़ का खतरा और बढ़ गया है। भारत ने अप्रैल 2025 में आतंकवादी हमले के बाद सिंधु जल संधि के तहत डेटा साझा करना बंद कर दिया था। इसके बावजूद इस बार मानवीय आधार पर अलर्ट भेजा गया है।
लगातार बढ़ रहा खतरा
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को पहला अलर्ट जारी किया गया था। इसके बाद मंगलवार और बुधवार को भी चेतावनी भेजी गई। अलर्ट में कहा गया कि तवी नदी में बाढ़ की उच्च संभावना बनी हुई है। यह नदी जम्मू से गुजरते हुए पाकिस्तान में चेनाब नदी से मिलती है। लगातार वर्षा और बांधों के गेट खोलने से जलस्तर में और वृद्धि हुई है।
पंजाब और जम्मू में संकट
भारी बारिश का असर पंजाब और जम्मू में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। सतलुज, ब्यास और रावी नदियां खतरे के निशान को पार कर चुकी हैं। जम्मू में भी नदियां उफान पर हैं और प्रशासन को बड़े बांधों के गेट खोलने पड़े हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि पानी नहीं छोड़ा जाता, तो बड़े हादसे हो सकते थे।
मानवीय दृष्टिकोण से बड़ा कदम
भारत ने पाकिस्तान को यह चेतावनी देकर साबित किया है कि मानवीय आधार पर सहयोग उसकी प्राथमिकता है। भले ही दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण हालात हों, लेकिन इस संकट की घड़ी में भारत ने जिम्मेदारी निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की चेतावनियां पाकिस्तान को संभावित आपदा से निपटने का समय प्रदान करती हैं।
संभावित हालात
यदि वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो तवी नदी समेत कई नदियां और उफान पर आ सकती हैं। ऐसे में सीमा पार स्थित गांवों और कस्बों में बड़े पैमाने पर नुकसान की आशंका बढ़ जाएगी। भारत द्वारा दिया गया अलर्ट इसलिए अहम है क्योंकि इससे प्रशासन को आपदा प्रबंधन की तैयारी का मौका मिलता है।
