राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर जहरीली हवा की चपेट में है। दीपावली के बाद से लगातार बढ़ रहे एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ने नागरिकों की सेहत पर बुरा असर डाला है। इसी बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दिल्ली की हवा पर तंज कसते हुए कहा — “जैसे-जैसे नवंबर का महीना चढ़ेगा, फेफड़ों पर प्रदर्शन का दबाव बढ़ेगा।”
थरूर का यह व्यंग्य उस सच्चाई को उजागर करता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के करोड़ों लोग जूझ रहे हैं। सर्दियों के मौसम के साथ-साथ आतिशबाजी और पराली जलाने की घटनाओं ने वायु गुणवत्ता को और बिगाड़ दिया है।
दीपावली के बाद दिल्ली का AQI कई इलाकों में 400 से ऊपर पहुंच गया, जो “खतरनाक” श्रेणी में आता है। हालांकि बीते गुरुवार को AQI में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल “आंकड़ों की चाल” है — हवा में मौजूद जहरीले कण अभी भी लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
थरूर ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर हिंदी में लिखा — “नवंबर का महीना चढ़ेगा, फेफड़ों पर परफॉरमेंस का बोझ बढ़ेगा!” यह टिप्पणी तेजी से वायरल हो गई और दिल्ली के प्रदूषण पर सरकारों की नीतियों पर बहस छेड़ दी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बढ़ता प्रदूषण खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने मास्क पहनने, घर में एयर प्यूरीफायर के उपयोग और सुबह-सवेरे बाहरी गतिविधियों से परहेज की सलाह दी है।
दिल्ली सरकार और केंद्रीय एजेंसियों ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई कदम उठाने का दावा किया है, लेकिन जनता का कहना है कि “कदमों से पहले इरादा साफ होना जरूरी है।”
