भारतीय शासन व्यवस्था को नई पहचान देने की कोशिश
केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का नाम बदलकर ‘सेवा तीर्थ’ कर दिया है। इसी के साथ केंद्रीय सचिवालय का नया नाम ‘कर्तव्य भवन’ रखा गया है। यह बदलाव शासन को सेवा और कर्तव्य आधारित पहचान से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया है।
राजभवनों की जगह अब ‘लोकभवन’
राजभवनों की जगह अब ‘लोकभवन’
गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देश के अनुसार पूरे देश में राजभवनों के नाम को लोकभवन में बदला जाएगा, जबकि उपराज्यपालों के निवास को लोक निवास कहा जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि “राजभवन” शब्द औपनिवेशिक मानसिकता से जुड़ा हुआ है और भारतीय लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
किन राज्यों ने लागू किया बदलाव?
किन राज्यों ने लागू किया बदलाव?
निर्देश जारी होने के बाद कई राज्यों ने तुरंत बदलाव लागू कर दिया।
अब तक —
🔹 पश्चिम बंगाल
🔹 केरल
🔹 असम
🔹 ओडिशा
🔹 उत्तराखंड
🔹 गुजरात
🔹 त्रिपुरा
🔹 तमिलनाडु
ने राजभवन → लोकभवन नाम अपना लिया है।
वहीं लद्दाख में ‘राज निवास’ को ‘लोक निवास’ नाम दिया गया है।
इसके अलावा राजस्थान ने भी नाम बदलने की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का अभियान जारी
औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने का अभियान जारी
मोदी सरकार इससे पहले भी ब्रिटिश नामों और प्रतीकों को हटाती रही है।
हाल के प्रमुख बदलाव —
✔ राजपथ → कर्तव्य पथ
✔ प्रधानमंत्री आवास → लोक कल्याण मार्ग
✔ बीटिंग रिट्रीट समारोह में विदेशी धुनों की जगह भारतीय धुनें
✔ सरकारी वेबसाइटों में हिंदी को प्राथमिक भाषा के रूप में प्राथमिकता
क्या है इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य?
इन ऐतिहासिक परिवर्तन के पीछे सरकार का उद्देश्य —
🔹 शासन को औपनिवेशिक शब्दों की जगह भारतीय मूल्यों से जोड़ना
🔹 प्रशासन को जनहित और सेवा के केंद्र में लाना
🔹 लोकतंत्र में जनभागीदारी और राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करना
