मोदी–पुतिन रिश्ते में नए अध्याय की शुरुआत: क्या भारत–रूस व्यापार 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य पूरा कर पाएगा?

भारत–रूस व्यापार संबंधों में उछाल: रक्षा खरीद से आगे बढ़कर 100 बिलियन डॉलर व्यापार की राह

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को दोनों देशों के लिए आर्थिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पुतिन की लंबे समय से चली आ रही दोस्ती ने भारत–रूस संबंधों को नई ऊंचाइयां दी हैं। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह दोस्ती केवल सैन्य उपकरणों की खरीद से आगे बढ़कर व्यापारिक विस्तार का रूप ले पाएगी?

वर्तमान में दोनों देशों के बीच लगभग 63.6 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में इसे 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाए — और यही एजेंडा इस कूटनीतिक दौरे का केंद्र बिंदु है।

रक्षा और ऊर्जा से आगे आर्थिक विस्तार

लंबे समय तक भारत–रूस व्यापार मुख्यतः तेल और सैन्य उपकरणों पर निर्भर रहा है। भारत रूस में लगभग 16 बिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है, जबकि रूस का भारत में निवेश लगभग 20 बिलियन डॉलर है। लेकिन अब दोनों देशों के सामने नए अवसरों के दरवाजे खुल रहे हैं:

🌍 संभावित नए व्यापारिक क्षेत्र

भारत की ताकत रूस की आवश्यकता
प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद आयात बढ़ाने में रुचि
फार्मास्यूटिकल्स स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए आवश्यक
आईटी और डिजिटल सेवाएँ तकनीकी सहयोग
वस्त्र और आभूषण बड़े उपभोक्ता बाजार की उपलब्धता

रूस भारत के खाद्य उत्पादों और सेवाओं को बड़े पैमाने पर खरीदने पर समझौता करने को तैयार है, जो भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए बेहद बड़ा अवसर होगा।

रूस के लिए भारत क्यों महत्वपूर्ण?

रूस वर्तमान भू–राजनैतिक चुनौतियों से जूझ रहा है। अमेरिका और यूरोप के प्रतिबंधों के बीच भारत रूस के लिए सबसे विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। भारत ने दबावों के बावजूद रूस से तेल खरीद जारी रखी — जिससे दोनों देशों के बीच भरोसा और गहरा हुआ।

इसके अलावा रूस के पास प्राकृतिक गैस का विशाल भंडार है और भारत में गैस की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में विशाल साझेदारी संभव है।

भारत के लिए संभावित लाभ

✔ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुँच बढ़ेगी
✔ निर्यात और उत्पादन में वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
✔ रक्षा एवं तकनीक क्षेत्र में उच्च स्तरीय सहयोग मिलेगा
✔ तेल और गैस आयात से ऊर्जा कीमतें स्थिर रखने में मदद

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह व्यापार विस्तार सफल होता है तो भारत आने वाले वर्षों में रूस के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शुमार हो सकता है।

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