छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आज रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सबसे बड़ा फैसला आत्मसमर्पित नक्सलियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों की वापसी और निराकरण प्रक्रिया को मंजूरी देना रहा।
मंत्रिपरिषद ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के अनुरूप है, जिसमें अच्छे आचरण और नक्सलवाद उन्मूलन में योगदान के आधार पर मामलों की समीक्षा का प्रावधान है। इसके लिए जिला स्तरीय समिति और एक मंत्रिपरिषद उपसमिति गठित की जाएगी, जो परीक्षण के बाद प्रकरणों को अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रिपरिषद के समक्ष पेश करेगी। केंद्र से जुड़े मामलों में भारत सरकार की अनुमति अनिवार्य होगी।
बैठक में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए सरकार ने छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप को मंजूरी दी। इसका उद्देश्य राज्य के 14 अधिनियमों को सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाना है। छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय दंड का प्रावधान जोड़कर न्यायालयों का बोझ कम करने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने की दिशा में यह बड़ा कदम माना जा रहा है।
इससे पहले राज्य सरकार 163 प्रावधानों में संशोधन कर जन विश्वास अधिनियम 2025 को लागू कर चुकी है। अब 116 और प्रावधानों को सरल और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी है। इन सुधारों से सुशासन, त्वरित न्याय और प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी।
साथ ही, मंत्रिपरिषद ने वर्ष 2025-26 के प्रथम अनुपूरक अनुमान तथा छत्तीसगढ़ विनियोग विधेयक, 2025 को भी विधानसभा में प्रस्तुत करने की अनुमति दी।
