ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित प्रसिद्ध बॉन्डी बीच पर यहूदी समुदाय के पवित्र त्योहार हनुक्का के दौरान हुई गोलीबारी ने पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। आठ दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक पर्व की पहली रात समुद्र तट पर आयोजित कार्यक्रम उस समय दहशत में बदल गया, जब अचानक गोलियों की आवाज गूंजने लगी। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों ने भीड़ में मौजूद बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को निशाना बनाया।
इस भयावह घटना में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को सिडनी के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद बॉन्डी बीच और आसपास के इलाकों को पूरी तरह सील कर दिया गया और पूरे ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया।
ऑस्ट्रेलियाई पुलिस और जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हमले को दो बंदूकधारियों ने अंजाम दिया, जो आपस में पिता-पुत्र थे। आरोपियों की पहचान साजिद अकरम और उसके बेटे नवीद अकरम के रूप में हुई है। दोनों ने समुद्र तट के पास बने पुल और ऊंचे स्थान से नीचे मौजूद भीड़ पर लगातार फायरिंग की। हमले के दौरान लोगों में भगदड़ मच गई और कई लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
घटना के दौरान एक साहसी नागरिक ने हमलावरों में से एक को पकड़ने की कोशिश भी की, जिससे कुछ देर के लिए अफरा-तफरी और बढ़ गई। इसी बीच मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभालते हुए दोनों हमलावरों पर जवाबी कार्रवाई की। पुलिस फायरिंग में एक आरोपी मौके पर ही ढेर हो गया, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया और बाद में उसकी भी मौत हो गई। शाम करीब साढ़े सात बजे पूरे इलाके को सुरक्षित घोषित किया गया।
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने इस घटना को 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद सबसे घातक गोलीबारी बताया है। प्रधानमंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही, धार्मिक स्थलों और सार्वजनिक आयोजनों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल, जांच एजेंसियां हमले के पीछे की मंशा, आरोपियों की पृष्ठभूमि और संभावित आतंकी कनेक्शन की गहन जांच कर रही हैं। यह घटना न केवल ऑस्ट्रेलिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बेहद जरूरी है।
