छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान बुधवार को राजनीतिक माहौल उस समय गर्मा गया, जब विपक्षी दल कांग्रेस ने केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के कथित “दुरुपयोग” का आरोप लगाते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया। कांग्रेस का कहना था कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्ष को डराने, दबाने और राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए किया जा रहा है। इस गंभीर आरोप पर चर्चा की मांग को लेकर कांग्रेस ने स्थगन प्रस्ताव प्रस्तुत किया, लेकिन अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने के बाद विवाद और तेज हो गया।
स्थगन प्रस्ताव अस्वीकार होते ही कांग्रेस विधायक सदन के गर्भगृह (वेल) में पहुंच गए। विधानसभा नियमों के तहत इसे अनुशासनहीनता मानते हुए स्पीकर ने कांग्रेस के 34 विधायकों के निलंबन की घोषणा कर दी। हालांकि, कुछ ही मिनटों बाद निलंबन रद्द कर दिया गया, लेकिन तब तक सदन की कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो चुकी थी और प्रश्नकाल प्रभावित रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शून्यकाल में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल “विपक्ष का गला घोंटने” के लिए किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि आर्थिक अपराध शाखा द्वारा गवाहों के बयान पहले से कार्यालय में तैयार किए गए और बाद में उन्हें जांच के दौरान वास्तविक दस्तावेजों की तरह पेश किया गया। बघेल ने यह भी दावा किया कि गवाहों को डराया-धमकाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।
अपने बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उस समय की गई, जब कांग्रेस विधायक रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे थे। इसके अलावा, उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ ईडी की कार्रवाई का हवाला देते हुए इसे विपक्ष को दबाने की साजिश बताया।
वहीं, वरिष्ठ भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर राज्य विधानसभा में चर्चा करना नियमों के दायरे में नहीं आता। स्पीकर रमन सिंह ने भी स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही अपने कक्ष में स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
सदन के भीतर माहौल और तनावपूर्ण हो गया जब कांग्रेस विधायकों ने “सत्यमेव जयते” के नारे लगाए, जबकि भाजपा सदस्यों ने “वंदे मातरम” के नारों से जवाब दिया। इससे पहले कांग्रेस विधायक “सत्यमेव जयते” लिखे पोस्टरनुमा कपड़े पहनकर सदन में पहुंचे थे, जिसे स्पीकर ने संसदीय नियमों के विरुद्ध बताया। बार-बार निर्देश देने के बावजूद पोस्टर न हटाने पर सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
अंततः स्पीकर ने प्रश्नकाल बाधित होने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह समय जनहित से जुड़े सवालों के लिए होता है और इसे राजनीतिक प्रदर्शन का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि राज्य में शराब घोटाला, कोयला घोटाला, CGPSC भर्ती, चावल मिलिंग और DMF जैसे मामलों की जांच चल रही है, जिनका संबंध पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से बताया जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे टकराव को उजागर कर दिया है, जहां लोकतंत्र, जांच एजेंसियों की भूमिका और संसदीय मर्यादाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
