आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक: भावनाओं से नहीं, नियम और विज्ञान से होगा समाधान

आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट: “कानून और सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता नहीं”

CG DARSHAN
2 Min Read
2 Min Read

आवारा कुत्तों से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील समस्या का समाधान केवल भावनात्मक आधार पर नहीं, बल्कि कानून, विज्ञान और सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत के समक्ष कहा कि सभी कुत्तों को पकड़ना या शेल्टर होम में रखना व्यावहारिक और आर्थिक रूप से संभव नहीं है। इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि रोकथाम ही सबसे प्रभावी उपाय है, लेकिन इसके लिए नियमों का ईमानदारी से पालन जरूरी है।

गेटेड कम्युनिटी में आवारा कुत्तों की मौजूदगी पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम संकेत देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सामुदायिक सहमति को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यदि बहुसंख्यक निवासी इसे बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा मानते हैं, तो समुदाय को निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि पशु प्रेम का अर्थ सभी जानवरों की चिंता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मानव जीवन की सुरक्षा को नजरअंदाज किया जाए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि यह तय करना असंभव है कि कौन सा कुत्ता काट सकता है और कौन नहीं। अदालत ने सुझाव दिया कि पशु प्रेमी शेल्टर में रखे गए कुत्तों की देखभाल और भोजन की जिम्मेदारी लें। इससे सड़कों पर आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इस मामले की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।

Share This Article
Leave a Comment