भारत की आर्थिक तस्वीर को लेकर सरकार ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए जारी राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमानों में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। यह दर पिछले वित्त वर्ष की 6.5 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है और देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ती स्थिरता को दर्शाती है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, इस आर्थिक विस्तार की मुख्य जिम्मेदारी मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर पर होगी। विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल होने की संभावना जताई गई है, जो औद्योगिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है। इसके साथ ही सेवा क्षेत्र में भी तेज रफ्तार बनी रहने की उम्मीद है। रिपोर्ट के मुताबिक, सेवा क्षेत्र की वास्तविक ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रह सकती है, जो समग्र विकास को मजबूती देगी।
दूसरी ओर, कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में मध्यम वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं में भी सीमित लेकिन स्थिर प्रगति की संभावना है। इन सबके बावजूद, व्यापक आर्थिक परिदृश्य उत्साहजनक बना हुआ है। मंत्रालय ने अनुमान लगाया है कि मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 8 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।
ये अग्रिम अनुमान नीतिगत दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर आगामी केंद्रीय बजट की तैयारी की जाती है, जिसे 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। कुल मिलाकर, 7.4 प्रतिशत की संभावित वृद्धि दर यह दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बुनियाद पर आगे बढ़ रही है और उद्योग व सेवा क्षेत्र विकास के प्रमुख स्तंभ बने हुए हैं।
