तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले में हुई इस कार्रवाई के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं छापे की जगह पहुंचीं, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया।
सीएम ममता बनर्जी ने ED की कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए आरोप लगाया कि जांच एजेंसी पार्टी से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और हार्ड डिस्क जब्त कर रही थी, जिनमें विधानसभा चुनावों से संबंधित जानकारियां थीं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने हस्तक्षेप कर इन दस्तावेजों को वापस लिया और आशंका जताई कि इनका राजनीतिक दुरुपयोग किया जा सकता था। ममता ने सवाल उठाया कि क्या किसी राजनीतिक दल के आईटी प्रमुख के घर छापा मारना केंद्रीय गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है?
ममता बनर्जी के आरोपों के बाद विपक्ष भी हमलावर हो गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री के छापे वाली जगह पहुंचने को अनैतिक, असंवैधानिक और जांच प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई में इस तरह का राजनीतिक दखल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और ED को इस पर कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
इस बीच ED ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है। देश के छह राज्यों में 15 अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई, जिसमें कोलकाता स्थित इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (IPAC) का कार्यालय भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, यह जांच सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर की जा रही कथित ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क से संबंधित है।
प्रतीक जैन पर हुई छापेमारी अब केवल जांच का विषय नहीं रही, बल्कि यह मामला केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।
