भारतीय शूटिंग जगत एक बार फिर गंभीर विवाद के केंद्र में आ गया है। राष्ट्रीय पिस्टल कोच अंकुश भारद्वाज पर 17 वर्षीय नाबालिग शूटर ने यौन शोषण का आरोप लगाया है। शिकायत सामने आते ही हरियाणा पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जबकि भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (NRAI) ने बिना देरी किए उन्हें कोचिंग ड्यूटी से निलंबित कर दिया।
पीड़िता के अनुसार, यह कथित घटना सूरजकुंड, फरीदाबाद स्थित एक होटल में हुई, जहां वह प्रतियोगिता और अभ्यास के सिलसिले में ठहरी हुई थी। परिवार का कहना है कि शूटर अगस्त 2024 से अंकुश भारद्वाज के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही थी और एक जनवरी को पूछताछ के दौरान उसने पूरी घटना का खुलासा किया।
एफआईआर में क्या आरोप हैं?
शिकायत में उल्लेख है कि यह मामला नई दिल्ली के करणी सिंह शूटिंग रेंज में आयोजित राष्ट्रीय चैंपियनशिप से जुड़ा है। अभ्यास सत्र के बाद कोच ने कथित तौर पर शूटर को होटल बुलाया, जहां यौन शोषण किया गया। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
NRAI की प्रतिक्रिया
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में NRAI के सचिव राजीव भाटिया ने बताया कि अंकुश भारद्वाज को नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है और उन्हें शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने तक वह किसी भी कोचिंग गतिविधि से जुड़े नहीं रहेंगे। गौरतलब है कि पेरिस ओलंपिक 2024 के बाद NRAI की सिफारिश पर भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने उन्हें राष्ट्रीय कोच नियुक्त किया था।
परिवार ने यह भी दावा किया है कि एक अन्य युवा शूटर के साथ भी इसी तरह का व्यवहार हुआ था, जिससे जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
कौन हैं अंकुश भारद्वाज?
हरियाणा के अंबाला निवासी अंकुश भारद्वाज ने 2005 में एनसीसी कैंप से शूटिंग की शुरुआत की। उन्होंने देहरादून स्थित जसपाल राणा इंस्टीट्यूट ऑफ शूटिंग एंड स्पोर्ट्स से प्रशिक्षण लिया। 2007 में आगरा में आयोजित जीवी मावलांकर शूटिंग प्रतियोगिता में तीन स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। 2008 के कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स, पुणे में 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा का स्वर्ण पदक भी उनके नाम रहा।
डोपिंग विवाद भी रहा
अंकुश भारद्वाज का करियर पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2010 में जर्मनी में एक जूनियर प्रतियोगिता के दौरान वह डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए थे, जिसके बाद उन पर प्रतिबंध लगाया गया। हालांकि 2012 में उन्होंने वापसी की और 2016 में हैनोवर शूटिंग प्रतियोगिता में भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में योगदान दिया।
मौजूदा स्थिति और आगे की कार्रवाई
वर्तमान में अंकुश मोहाली में एक निजी शूटिंग रेंज संचालित करते थे और सीमित खिलाड़ियों को व्यक्तिगत प्रशिक्षण देते थे। NRAI ने साफ किया है कि जांच पूरी होने तक वे किसी भी भूमिका में सक्रिय नहीं रहेंगे। यह मामला भारतीय खेल तंत्र में नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
