मुंबई नगर निगम चुनाव 2026 ने यह संकेत दे दिया है कि महानगर की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। इस चुनाव में कई युवा और चर्चित चेहरों ने जीत दर्ज कर यह साबित किया कि जनता अब केवल परंपरागत राजनीति नहीं, बल्कि विकास, पारदर्शिता और भरोसेमंद नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।
भाजपा की तेजस्वी अभिषेक घोसालकर और राजश्री शिरवाडकर इस चुनाव के बाद महापौर पद की सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। वहीं एनसीपी की मर्जिया पठान और AIMIM की सहर यूनुस शेख की जीत ने यह दिखा दिया है कि मुंबई की राजनीति में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि से आने वाले नेता भी मजबूत पकड़ बना रहे हैं।
चुनावी नतीजों के बाद सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि मुंबई महानगरपालिका का अगला महापौर शिवसेना (शिंदे गुट) से हो सकता है और वह मराठी मूल का होगा। माना जा रहा है कि महायुति के भीतर संतुलन बनाए रखने के लिए भाजपा यह पद अपने सहयोगी दल को सौंप सकती है। इस चुनाव में भाजपा ने 88 सीटें जीतकर खुद को मुंबई की सबसे प्रभावशाली पार्टी के रूप में स्थापित किया है।
तेजस्वी अभिषेक घोसालकर: जनसमर्थन की मजबूत मिसाल
दहिसर के वार्ड नंबर 2 से 10 हजार से अधिक मतों से जीतने वाली तेजस्वी घोसालकर इस चुनाव का सबसे चर्चित नाम बनकर उभरी हैं। हाल ही में भाजपा में शामिल होने के बावजूद उन्होंने असाधारण जनसमर्थन हासिल किया। कठिन व्यक्तिगत परिस्थितियों के बीच उनकी जीत को साहस, रणनीति और जनता से मजबूत जुड़ाव का परिणाम माना जा रहा है।
राजश्री शिरवाडकर: मराठी महिला नेतृत्व की नई पहचान
वार्ड नंबर 172 से विजयी राजश्री शिरवाडकर को भाजपा की निष्ठावान और सक्रिय मराठी महिला नेता के रूप में देखा जा रहा है। यदि महापौर पद के लिए महिला उम्मीदवार पर विचार होता है, तो उनका नाम सबसे आगे माना जा रहा है। स्थानीय मुद्दों पर उनकी पकड़ और निरंतर संवाद उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
अन्य विजयी चेहरे भी चर्चा में
मराठी फिल्म अभिनेत्री निशा पारुलेकर ने वार्ड नंबर 25 से जीत दर्ज कर राजनीति में सफल कदम रखा। वहीं एनसीपी की मर्जिया पठान और AIMIM की सहर यूनुस शेख ने यह साबित किया कि मुंबई की राजनीति में युवा और नए चेहरे भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
मुंबई का मेयर मराठी और हिंदू होगा: सीएम फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोहराया कि मुंबई का मेयर मराठी और हिंदू होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा ने विकास और ईमानदारी को चुनावी एजेंडा बनाया और जनता ने उसी सोच को समर्थन दिया। उनके अनुसार विकास-आधारित राजनीति ही मुंबई के भविष्य की दिशा तय करेगी।
