30,000 करोड़ की विरासत पर घमासान, फैमिली ट्रस्ट को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में टकराव

फैमिली ट्रस्ट पर सवाल, 30,000 करोड़ की संपत्ति को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई तेज

CG DARSHAN
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दिवंगत उद्योगपति और सोना कॉमस्टार के पूर्व चेयरमैन संजय कपूर की विशाल संपत्ति को लेकर जारी कानूनी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। करीब 30,000 करोड़ रुपये की विरासत से जुड़े इस मामले में अब उनकी मां रानी कपूर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ‘रानी कपूर फैमिली ट्रस्ट’ को रद्द करने की मांग की है।

🔹 क्यों अहम है फैमिली ट्रस्ट का मामला

रानी कपूर द्वारा जिस ट्रस्ट को निरस्त करने की मांग की गई है, वह सोना कॉमस्टार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखता है। ऐसे में इस ट्रस्ट का भविष्य तय होना न केवल पारिवारिक संपत्ति, बल्कि कॉरपोरेट नियंत्रण के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

🔹 विरासत विवाद की पृष्ठभूमि

संजय कपूर का निधन 12 जून को यूके में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उनके निधन के बाद संपत्ति को लेकर विवाद तब सामने आया, जब करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बच्चों ने अपने पिता की संपत्ति में अधिकार का दावा किया।

🔹 प्रिया सचदेव और करिश्मा कपूर के बीच टकराव

इस कानूनी जंग में संजय कपूर की तीसरी पत्नी और विधवा प्रिया सचदेव कपूर ने खुद को उनकी वैध पत्नी और प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी बताते हुए अदालत का रुख किया है। वहीं, करिश्मा कपूर पक्ष ने पुराने तलाक समझौतों को आधार बनाकर अपने बच्चों के अधिकारों पर जोर दिया है।

🔹 प्रिया सचदेव कपूर की याचिका

प्रिया सचदेव कपूर ने अदालत से करिश्मा कपूर और संजय कपूर के बीच हुए तलाक से जुड़े प्रमाणित दस्तावेजों की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संजय कपूर ने अपने जीवनकाल में करिश्मा कपूर और बच्चों के लिए कौन-सी आर्थिक और कस्टडी व्यवस्थाएं की थीं।

🔹 करिश्मा कपूर पक्ष की दलील

करिश्मा कपूर के वकील ने प्रिया की याचिका को अनावश्यक और गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करार दिया है। उनके अनुसार, तलाक से संबंधित दस्तावेज पहले ही न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रह चुके हैं, इसलिए दोबारा मांग उचित नहीं है।

🔹 दिल्ली हाईकोर्ट का रुख

दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर ने चैंबर में हुई सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत यह तय करेगी कि क्या ऐसे गोपनीय दस्तावेज साझा किए जा सकते हैं। कोर्ट ने करिश्मा कपूर को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश भी दिए हैं।

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