गुरुग्राम में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की दर्दनाक मौत, 4 दिन बाद NDRF रेस्क्यू में निकली कार

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत ने छोड़े कई सवाल, दोस्तों ने बताई पूरी कहानी

CG DARSHAN
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ग्रेटर नोएडा में हुए एक भयावह हादसे ने एक उभरते हुए आईटी प्रोफेशनल की जिंदगी हमेशा के लिए थाम दी। पिछले चार वर्षों से गुरुग्राम की विभिन्न कंपनियों में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के चार दिन बाद पुलिस ने एनडीआरएफ की सहायता से उनकी कार को पानी से बाहर निकाला।

  • पढ़ाई से प्रोफेशन तक का सफर

युवराज ने वर्ष 2022 में गलगोटिया कॉलेज, ग्रेटर नोएडा से बीटेक की डिग्री प्राप्त की थी। नौकरी शुरू होने के बाद वह गाजियाबाद में रहकर मेट्रो के जरिए गुरुग्राम स्थित अपने ऑफिस जाते थे। उस समय मेट्रो सुविधा के चलते यात्रा सुगम थी।

ग्रेटर नोएडा शिफ्ट होने के बाद सार्वजनिक परिवहन की सीमित उपलब्धता के कारण युवराज को सप्ताह में एक-दो बार कार से ऑफिस आना-जाना पड़ता था।

  •  हादसे से पहले की आखिरी रात

घटना वाली रात युवराज गुरुग्राम से दो दोस्तों के साथ नोएडा पहुंचे थे। दोस्तों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक छोड़ने के बाद वह स्वयं घर के लिए निकले, लेकिन रास्ते में यह हादसा हो गया।

दोस्तों के मुताबिक, युवराज तेज रफ्तार से गाड़ी चलाने वालों में नहीं थे और हमेशा सुरक्षा का ध्यान रखते थे।

  •  काम के प्रति जुनून और सपने

युवराज हाल ही में, करीब दो महीने पहले ही एक नई कंपनी से जुड़े थे। वह जिस डेटा स्टोरेज फर्म में कार्यरत थे, वहां उनकी तकनीकी दक्षता और ईमानदारी की सराहना की जाती थी।

परिवार ने बताया कि युवराज की बहन यूनाइटेड किंगडम में रहती हैं और युवराज भी भविष्य में शादी के बाद वहीं बसने का सपना देखते थे। वह मेहनती, जिम्मेदार और अपने परिवार के प्रति बेहद संवेदनशील थे।

  •  छह घंटे चला रेस्क्यू, उठे सवाल

पुलिस और एनडीआरएफ की टीम ने सोनार तकनीक की मदद से कार की स्थिति का पता लगाया। रेस्क्यू के दौरान पहले इस्तेमाल की गई पुरानी बेल्ट टूट गई, जिससे ऑपरेशन में बाधा आई। बाद में लोहे की चेन की मदद से कार को बाहर निकाला गया।

इस पूरे अभियान में संसाधनों और तैयारी को लेकर लापरवाही के सवाल भी सामने आए हैं।

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