भावुक हुए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, मेला छोड़ने का लिया कठिन निर्णय

प्रयागराज माघ मेला: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आहत मन से छोड़ा मेला

CG DARSHAN
CG DARSHAN 2 Min Read
2 Min Read
Advertisement Carousel

प्रयागराज में आयोजित माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भावुक मनोदशा के साथ विदा लेने का फैसला किया है। बुधवार सुबह प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि माघ मेला में उनका आगमन पूर्ण श्रद्धा और धार्मिक आस्था के साथ हुआ था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें यह कठिन निर्णय लेने पर मजबूर कर दिया।

श्रद्धा के साथ आए, लेकिन आहत होकर लौटे

शंकराचार्य ने कहा कि Prayagraj सनातन संस्कृति, शांति और विश्वास की प्रतीक रही है। ऐसे पावन स्थल से बिना संगम स्नान किए लौटना उनके लिए मानसिक रूप से अत्यंत पीड़ादायक है।

अप्रत्याशित घटनाक्रम से मन व्यथित

उन्होंने बताया कि माघ मेला के दौरान एक ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। इस घटनाक्रम ने उन्हें गहरे रूप से प्रभावित किया और ऐसा महसूस हुआ कि उनकी पहचान और सम्मान पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया।

आस्था कर्मकांड से ऊपर

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि संगम स्नान उनके लिए मात्र धार्मिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि गहरी आस्था और आध्यात्मिक भाव से जुड़ा विषय है। इसके बावजूद, मौजूदा माहौल में मेला छोड़ना उन्हें उचित लगा।

संतों और श्रद्धालुओं में प्रतिक्रिया

शंकराचार्य के इस निर्णय के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं के बीच चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई लोगों ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सनातन परंपराओं में सम्मान और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है।

निष्कर्ष

शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ा

बिना संगम स्नान लौटने का फैसला

अप्रत्याशित घटनाओं से मन आहत

संत समाज में व्यापक चर्चा

Share This Article
Leave a comment