तिरुमला स्थित भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के प्रसाद ‘तिरुपति लड्डू’ में कथित घी मिलावट को लेकर दायर याचिका पर Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने भाजपा नेता Subramanian Swamy की याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच समिति को चुनौती दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक जांच और आपराधिक कार्यवाही का उद्देश्य और दायरा अलग-अलग है। इसलिए दोनों प्रक्रियाओं के समानांतर चलने में कोई कानूनी बाधा नहीं है।
एसआईटी रिपोर्ट और जांच की दिशा
जांच में यह संकेत मिला है कि मंदिर को शुद्ध घी के नाम पर केमिकल से प्रोसेस किया गया पामोलिन तेल सप्लाई किया गया था। इस मामले में अब Enforcement Directorate मनी लॉन्ड्रिंग और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। एजेंसी को शक है कि मिलावटी घी की सप्लाई से जुड़े धन का इस्तेमाल हवाला नेटवर्क के माध्यम से किया गया हो सकता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद तब सामने आया जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने सितंबर 2024 में पिछली YSR Congress Party सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बाद में टीटीडी चेयरमैन B. R. Naidu ने खुलासा किया कि लगभग 60 लाख किलो संदिग्ध घी की आपूर्ति की गई, जिसकी अनुमानित कीमत 250 करोड़ रुपये बताई गई।
अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार द्वारा गठित समिति की प्रशासनिक जांच और आपराधिक चार्जशीट की प्रक्रिया अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती हैं। इसलिए किसी प्रकार के हितों के टकराव या ओवरलैप की आशंका नहीं बनती।

