पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामले में अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी कानूनी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उनकी गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज उस एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें नाबालिगों के कथित यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस केस में शंकराचार्य के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरि और अन्य को भी आरोपी बनाया गया है।
बताया जा रहा है कि ट्रायल कोर्ट के निर्देश पर यह मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए शंकराचार्य ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पहले आदेश सुरक्षित रखा और अब फैसला सुनाते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और मामले के तथ्यों का परीक्षण करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की है। साथ ही, शंकराचार्य की अग्रिम जमानत याचिका को भी स्वीकार कर लिया गया है, जिससे उन्हें तत्काल कानूनी सुरक्षा मिल गई है।
इस मामले में याचिका एक धर्माचार्य के शिष्य की ओर से दायर की गई थी, जिसके आधार पर पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू हुई। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद मामले की आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
फिलहाल, इस फैसले से आरोपियों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन केस की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण पहलुओं पर फैसला होना बाकी है।

