जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव: डेटा रहेगा गोपनीय, डिजिटल सर्वे और लिव-इन को मिलेगी मान्यता

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जनगणना 2027: व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहेगी

आगामी जनगणना 2027 को लेकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नागरिकों का व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह गोपनीय रहेगा। रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी को न तो RTI के तहत साझा किया जाएगा, न अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश किया जाएगा और न ही किसी अन्य संस्था को दिया जाएगा।

डिजिटल जनगणना से प्रक्रिया होगी तेज और पारदर्शी

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। डेटा संग्रह मोबाइल एप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

दो चरणों में पूरा होगा सर्वे, 30 लाख कर्मचारी होंगे शामिल

जनगणना दो चरणों में आयोजित होगी। पहला चरण हाउस लिस्टिंग का होगा, जिसमें 33 सवाल पूछे जाएंगे और यह प्रक्रिया 45 दिनों तक चलेगी। दूसरा चरण फरवरी 2027 में शुरू होगा, जिसमें व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी जैसे आयु, शिक्षा, धर्म, व्यवसाय और प्रवास से जुड़े आंकड़े जुटाए जाएंगे।

इस पूरे अभियान में करीब 30 लाख प्रगणक और अधिकारी शामिल होंगे, जो घर-घर जाकर सुरक्षित डिजिटल माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे।

लिव-इन रिलेशनशिप को पहली बार मिलेगा स्थान

जनगणना 2027 का एक बड़ा बदलाव यह है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी विवाहित श्रेणी में शामिल किया जाएगा, बशर्ते वे अपने संबंध को स्थायी मानते हों। यह कदम सामाजिक बदलाव को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

नियमों के उल्लंघन पर कड़ी सजा, अधिकारियों को सख्त निर्देश

जनगणना से पहले अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि डेटा का दुरुपयोग, लापरवाही या अनुचित व्यवहार अपराध माना जाएगा। जनगणना अधिनियम 1948 के तहत ऐसे मामलों में जुर्माना और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है।

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