पाकिस्तान में ईंधन की बढ़ती कीमतों ने आर्थिक संकट को और गहरा कर दिया है। पेट्रोल और डीजल के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के बाद आम जनता के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
नई कीमतों के अनुसार, पेट्रोल 458 रुपये प्रति लीटर और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुका है। इतनी बड़ी वृद्धि ने न सिर्फ परिवहन बल्कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी सीधा असर डाला है।
इस फैसले के पीछे वैश्विक परिस्थितियां अहम मानी जा रही हैं। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान जैसे आयात-निर्भर देशों पर पड़ा है।
वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने स्पष्ट किया है कि ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिए गए हैं। साथ ही, सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ बातचीत कर रही है ताकि वित्तीय दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सके।
हालांकि, सरकार ने राहत देने के लिए कई कदम उठाए हैं। दोपहिया चालकों को सीमित मात्रा में सस्ती दर पर ईंधन मिलेगा, जबकि छोटे किसानों को प्रति एकड़ आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट सेक्टर—जिसमें ट्रक और पब्लिक ट्रांसपोर्ट शामिल हैं—को भी सब्सिडी देने का ऐलान किया गया है।
खाद्य आपूर्ति से जुड़े वाहनों को मासिक सहायता दी जाएगी ताकि जरूरी सामानों की कीमतों में अत्यधिक बढ़ोतरी को रोका जा सके। साथ ही, रेलवे को भी सब्सिडी दी जाएगी ताकि आम यात्रियों पर किराए का बोझ न बढ़े।
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस फैसले को देशहित में लिया गया “कठिन लेकिन आवश्यक” कदम बताया है। उनका कहना है कि सब्सिडी को केवल जरूरतमंद वर्ग तक सीमित रखना जरूरी है, ताकि आर्थिक संतुलन बना रहे।
ऊर्जा बचत के लिए सरकार ने बाजारों के समय में कटौती का भी फैसला लिया है। इससे करीब 1,200 मेगावाट बिजली बचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो मौजूदा ऊर्जा संकट में राहत दे सकता है।
फिलहाल, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में स्थिरता नहीं आती, तो पाकिस्तान में महंगाई और बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों की परेशानियां और गहरी हो सकती हैं।

