कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Jairam Ramesh ने महिला आरक्षण कानून की अधिसूचना को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा जितना सामने दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण पर्दे के पीछे चल रही परिसीमन की राजनीति है। उनके मुताबिक, संसद के विशेष सत्र में पारित निर्णयों को केवल संवैधानिक प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके राजनीतिक संकेतों को समझना जरूरी है।
रमेश ने बताया कि Nari Shakti Vandan Adhiniyam को 22 सितंबर 2023 को सर्वसम्मति से पारित किया गया था, लेकिन इसे लंबे समय तक लागू नहीं किया गया। अचानक 16 अप्रैल की रात इसे अधिसूचित करने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठाया और कहा कि यह निर्णय राजनीतिक समय-प्रबंधन का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने पूछा कि जब कानून पहले से पारित था, तो अब इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई।
लोकसभा की सीटों के पुनर्गठन को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 543 सीटें हैं, लेकिन भविष्य में परिसीमन के बाद राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व कैसे संतुलित होगा, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से दिए गए मौखिक आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं, जब तक कि विधेयक में स्पष्ट प्रावधान न जोड़े जाएं।
Indian National Congress के नेता ने जातिगत जनगणना को लेकर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय पर ठोस योजना प्रस्तुत नहीं कर रही है, जिससे संदेह और गहराता है। असम और जम्मू-कश्मीर में हुए परिसीमन का हवाला देते हुए उन्होंने इसे असंतुलित और विवादित बताया।
जयराम रमेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सरकार परिसीमन और जातिगत जनगणना जैसे अहम मुद्दों पर पारदर्शिता नहीं दिखाती, तब तक उसकी नीयत पर भरोसा करना कठिन रहेगा।

