अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच अब कूटनीतिक गतिविधियां फिर तेज होती नजर आ रही हैं। हालांकि प्रत्यक्ष वार्ता फिलहाल ठप है, लेकिन दोनों देश अप्रत्यक्ष माध्यमों से बातचीत के रास्ते तलाश रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका अहम बनती जा रही है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस्लामाबाद पहुंचकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्रीय शांति और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गहन चर्चा हुई।
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाए बिना किसी भी तरह की प्रत्यक्ष बातचीत संभव नहीं होगी। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल संवाद अप्रत्यक्ष चैनलों के जरिए ही जारी रहेगा।
दोनों देशों के बीच हालिया तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका की सैन्य मौजूदगी में इजाफा और ईरान द्वारा रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। जहाजों की जब्ती जैसी घटनाओं ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच ओमान और रूस जैसे देश भी इस विवाद को सुलझाने के प्रयासों में जुटे हैं। अतीत में ओमान ने दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता में अहम भूमिका निभाई थी, जिससे संवाद की प्रक्रिया जारी रह सकी थी।
ईरान के अंदरूनी राजनीतिक हालात भी इस पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। उदारवादी और कट्टरपंथी गुटों के बीच मतभेद के चलते किसी ठोस निर्णय तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। वहीं, अमेरिका भी इन आंतरिक परिस्थितियों को वार्ता के अहम पहलू के रूप में देख रहा है।
कुल मिलाकर, कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और उम्मीदें बनी हुई हैं, लेकिन प्रतिबंध, अविश्वास और क्षेत्रीय तनाव के चलते अमेरिका-ईरान संबंधों में सुधार की राह अभी भी लंबी और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।

