SIR वोट कटौती मामला पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नई याचिका दायर करने की मिली अनुमति

CG DARSHAN
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पश्चिम बंगाल में SIR वोट कटौती मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया है कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों से कम था, जिन्हें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाया गया। इस दावे के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी समेत अन्य पक्षों को नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दे दी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि संबंधित पक्ष अपने दावों को नए तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अदालत में प्रस्तुत कर सकते हैं। इस फैसले के बाद SIR वोट कटौती मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।

चुनाव आयोग ने अदालत में क्या रखा पक्ष?

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव परिणामों से जुड़े विवादों के समाधान के लिए चुनाव याचिका ही उचित कानूनी माध्यम है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित मामलों में निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील की जा सकती है।

हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए नई याचिका दायर करने का विकल्प खुला रखा। माना जा रहा है कि SIR वोट कटौती मामला आने वाले दिनों में चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों पर बड़ी बहस को जन्म दे सकता है।

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बढ़ा विवाद

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि टीएमसी को 80 सीटें मिली थीं। चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ, लेकिन अब मतदाता सूची संशोधन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत में दावा किया कि जिन सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम था, वहां हटाए गए वोट निर्णायक साबित हो सकते थे। इसी कारण SIR वोट कटौती मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।

मालदा हिंसा मामले में भी सुप्रीम कोर्ट सख्त

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाए जाने के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच रिपोर्ट तय समय सीमा में संबंधित अदालत में पेश की जाए।

मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने कानून व्यवस्था और न्यायिक संस्थाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। वहीं, SIR वोट कटौती मामला से जुड़े राजनीतिक विवाद पर भी अदालत की नजर बनी हुई है।

चुनावी पारदर्शिता पर बढ़ सकती है नई बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नई याचिकाओं में ठोस आंकड़े और दस्तावेज पेश किए जाते हैं, तो SIR वोट कटौती मामला देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि नई याचिकाओं पर अदालत क्या रुख अपनाती है और क्या चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं में किसी बदलाव की जरूरत महसूस की जाती है।

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