बंगाल कैबिनेट विस्तार में 35 नए चेहरों की एंट्री, स्वपन दासगुप्ता और अर्जुन सिंह बने मंत्री

CG DARSHAN
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पश्चिम बंगाल में सोमवार को हुए बंगाल कैबिनेट विस्तार ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपने पहले मंत्रिमंडल विस्तार में 35 नए मंत्रियों को शामिल किया। लोकभवन में आयोजित समारोह में राज्यपाल आरएन रवि ने सभी मंत्रियों को सामूहिक रूप से शपथ दिलाई।

यह विस्तार सरकार के गठन के बाद अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फैसला माना जा रहा है।

41 सदस्यों की हुई मंत्री परिषद

हालिया बंगाल कैबिनेट विस्तार के बाद राज्य मंत्रिपरिषद की कुल संख्या 41 तक पहुंच गई है। विधानसभा की कुल 294 सीटों के आधार पर सरकार अधिकतम 44 मंत्रियों को नियुक्त कर सकती है। ऐसे में अभी भी तीन पद खाली हैं, जिन्हें भविष्य में भरा जा सकता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और विभिन्न क्षेत्रों को बेहतर प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

किन नेताओं को मिली कैबिनेट में जगह?

बंगाल कैबिनेट विस्तार के दौरान 13 नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया। इनमें स्वपन दासगुप्ता, अर्जुन सिंह, दीपक बर्मन, तपस रॉय, मनोज कुमार उरांव, गौरी शंकर घोष, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय और शरद्वत मुखर्जी जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।

इसके अलावा राजेश महतो, डॉ. इंद्रनील खान और मालती रावा रॉय को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है।

नए चेहरों को मिला मौका

मंत्रिमंडल विस्तार में कई नए नेताओं को भी सरकार में शामिल किया गया है। जोएल मुर्मू, शांतनु प्रमाणिक, पूर्णिमा चक्रवर्ती, उमेश राय, अशोक डिंडा, आनंदमय बर्मन, कौशिक चौधरी, गर्गी दास घोष और सुमना सरकार जैसे नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इससे भाजपा नेतृत्व का संदेश स्पष्ट है कि संगठन में सक्रिय और जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं को सरकार में अवसर दिया जाएगा।

विभागों के आवंटन पर टिकी निगाहें

बंगाल कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबसे बड़ी चर्चा विभागों के बंटवारे को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि जल्द ही मंत्रियों को उनके विभाग सौंपे जाएंगे। कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालयों में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पहली बार विधायक बने कई नेताओं को भी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिल सकती है।

 आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए अहम कदम

विशेषज्ञों के अनुसार बंगाल कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक जरूरत नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी हिस्सा है। इससे क्षेत्रीय संतुलन, सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठनात्मक मजबूती को बढ़ावा मिलेगा। आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने यह विस्तार काफी सोच-समझकर किया है।

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