आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पेट्रोल कीमत को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल की कीमत 102 रुपये से घटाकर 82 रुपये प्रति लीटर की जानी चाहिए।
केजरीवाल ने कहा कि ईंधन की ऊंची कीमतों का सीधा असर आम नागरिकों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है। इसके अलावा परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई भी लगातार प्रभावित हो रही है।
मुख्य बातें
- पेट्रोल 102 रुपये से घटाकर 82 रुपये करने की मांग।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का हवाला।
- तेल कंपनियों को अवैध मुनाफा मिलने का आरोप।
- डीजल की कीमतों में भी समान अनुपात में कटौती की मांग।
पेट्रोल कीमत कम होने से महंगाई पर क्या असर पड़ेगा?
केजरीवाल का कहना है कि पेट्रोल कीमत में कमी आने से माल ढुलाई की लागत घटेगी। इसका सकारात्मक असर खाद्य पदार्थों, रोजमर्रा के सामान और परिवहन सेवाओं पर दिखाई देगा। इसलिए ईंधन सस्ता होने से आम जनता को महंगाई से राहत मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम पहले की तुलना में काफी कम हुए हैं। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है।
तेल कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप
पेट्रोल कीमत को लेकर केजरीवाल ने आरोप लगाया कि तेल कंपनियां ऊंचे दामों के जरिए अतिरिक्त लाभ कमा रही हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद कई बार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई, लेकिन उसका पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचाया गया।
उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि पिछले वर्षों में ईंधन से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को तेल कंपनियों के मुनाफे से अधिक जनता के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
एक नजर में
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का दावा।
- पेट्रोल 82 रुपये प्रति लीटर करने की मांग।
- डीजल के दाम भी कम करने की अपील।
- महंगाई कम करने के लिए ईंधन सस्ता करने पर जोर।
- केंद्र सरकार की ईंधन नीति पर सवाल।
क्या है पूरा मामला?
केजरीवाल का कहना है कि देश में ईंधन की कीमतें कम होने से परिवहन खर्च घटेगा और बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अभी तक उनकी मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में पेट्रोल कीमत को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा और बढ़ सकती है। फिलहाल पेट्रोल कीमत को लेकर बयानबाजी राजनीतिक विमर्श का प्रमुख विषय बनी हुई है।

