दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में गिने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य में अब जहाजों को पहले से अधिक औपचारिक प्रक्रिया का सामना करना होगा। ईरान ने नई अनुमति प्रणाली लागू करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि बिना पूर्व मंजूरी कोई भी जहाज इस मार्ग से नहीं गुजर सकेगा। नए ईरान शिपिंग परमिट नियमों को वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
ईरान का दावा है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य समुद्री सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करना है। इसके लिए एक नई एजेंसी का गठन किया गया है, जो सभी जहाजों के दस्तावेजों और यात्रा संबंधी सूचनाओं की जांच करेगी।
क्यों जरूरी हुई नई व्यवस्था?
- क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियां
- समुद्री दुर्घटनाओं की रोकथाम
- जहाजों की बेहतर निगरानी
- संवेदनशील समुद्री मार्गों का नियंत्रण
इन कारणों को देखते हुए ईरान शिपिंग परमिट प्रणाली को लागू किया गया है।
48 घंटे पहले देना होगा आवेदन
नए नियमों के तहत जहाज संचालकों को निर्धारित पोर्टल पर कम से कम 48 घंटे पहले आवेदन करना होगा। आवेदन के दौरान जहाज की पहचान, कार्गो विवरण, बीमा दस्तावेज और यात्रा मार्ग जैसी जानकारियां साझा करनी होंगी।
आवेदन में मांगी जाएंगी ये जानकारियां
जहाज संबंधी जानकारी
- जहाज का नाम
- आईएमओ नंबर
- पंजीकरण देश
- जहाज का प्रकार
कार्गो और यात्रा विवरण
- माल का प्रकार
- माल की मात्रा
- प्रस्थान और गंतव्य बंदरगाह
- प्रस्तावित यात्रा तिथि
बीमा और चालक दल
- बीमा दस्तावेज
- चालक दल की संख्या
- चालक दल की राष्ट्रीयता
परमिट मिलने के बाद भी रहेंगी कई शर्तें
स्वीकृत जहाजों को सीमित अवधि वाला ट्रांजिट परमिट दिया जाएगा। यह परमिट केवल एक बार के उपयोग के लिए मान्य होगा। यदि निर्धारित समय सीमा में यात्रा पूरी नहीं होती, तो फिर से आवेदन करना पड़ेगा।
नई ईरान शिपिंग परमिट व्यवस्था के तहत जहाजों को तय मार्ग से ही गुजरना होगा। किसी भी प्रकार का मार्ग परिवर्तन नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।
शुरुआती 60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क
ईरान ने फिलहाल दो महीने तक सुरक्षा और बीमा सेवाएं मुफ्त देने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में इन सेवाओं के लिए शुल्क वसूला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुल्क लागू होते हैं तो ईरान शिपिंग परमिट प्रक्रिया से गुजरने वाली कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ सकती है।
भारत और वैश्विक बाजार पर संभावित असर
भारत सहित कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर हैं। दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में नियमों में किसी भी बदलाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

