स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत आयोजित होने वाली सोमनाथ स्वाभिमान सांस्कृतिक यात्रा में छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण भागीदारी रहेगी। राज्य से 1000 विशिष्टजन विशेष ट्रेन के माध्यम से सोमनाथ धाम पहुंचेंगे। यह आयोजन संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करना है।
आस्था के साथ जुड़ा इतिहास
स्वाभिमान पर्व भारत की उस गौरवशाली परंपरा को याद करने का अवसर है, जिसने अनेक चुनौतियों के बावजूद अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखा। सोमनाथ मंदिर भारतीय आत्मविश्वास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक माना जाता है। इस यात्रा के माध्यम से प्रतिभागियों को भारत के समृद्ध इतिहास और आध्यात्मिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
संस्कृति कर्मियों का होगा प्रतिनिधित्व
इस स्वाभिमान पर्व में कलाकारों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और सम्मानित नागरिकों की विशेष भागीदारी होगी। प्रतिभागी अपने क्षेत्र की मिट्टी और जल लेकर जाएंगे, जो सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रीय समरसता का प्रतीक बनेगा। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित करने का मंच भी प्रदान करेगा।
यात्रा में होंगे कई आकर्षण
स्वाभिमान पर्व के दौरान प्रतिभागी सोमनाथ मंदिर दर्शन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण में भाग लेंगे। विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों के साथ संवाद और अनुभव साझा करने का अवसर भी मिलेगा। इससे भारतीय संस्कृति की विविधता और समृद्ध परंपराओं को समझने का दायरा और व्यापक होगा।
सांस्कृतिक गौरव को मिलेगी नई ऊर्जा
यह स्वाभिमान पर्व केवल एक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और आध्यात्मिक मूल्यों का उत्सव है। इससे छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, कला और साहित्य को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलेगी। साथ ही समाज में सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रप्रेम की भावना को भी मजबूती मिलेगी।

