देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा कदम उठाया है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मामलों की जांच के तहत एजेंसी ने 16 राज्यों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। इस कार्रवाई को देश के सबसे बड़े साइबर अपराध विरोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है।
ऑपरेशन चक्र के तहत चला विशेष अभियान
CBI ने इस कार्रवाई को “ऑपरेशन चक्र” नामक विशेष अभियान के तहत अंजाम दिया। एजेंसी का लक्ष्य साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क, तकनीकी संसाधनों और आर्थिक चैनलों की पहचान करना है। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े कई संदिग्ध समूह लंबे समय से सक्रिय थे।
60 टीमों ने संभाली जांच की कमान
अभियान के लिए 60 विशेष टीमों का गठन किया गया। इन टीमों ने अलग-अलग राज्यों में समन्वित तरीके से तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच की जाएगी।
16 राज्यों के 80 से ज्यादा ठिकाने जांच के दायरे में
CBI की टीमों ने पंजाब, गुजरात, दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, असम, पश्चिम बंगाल, मणिपुर, कर्नाटक और ओडिशा में कार्रवाई की। एजेंसी का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट स्कैम का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और विभिन्न माध्यमों से लोगों को निशाना बनाया जा रहा था।
कैसे लोगों को बनाते हैं शिकार?
इस तरह की ठगी में अपराधी खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करते हैं। वे फर्जी कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ितों से धनराशि ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
जनता के लिए क्या है संदेश?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर अपनी निजी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो उसकी सूचना तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या पुलिस को देनी चाहिए। जागरूकता ही डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव का सबसे प्रभावी हथियार है।

