जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले ने छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले को गहरे दुख में डाल दिया। दीपक रात्रे की मौत की खबर मिलते ही बुंदेली गांव में मातम छा गया। महज 24 वर्षीय दीपक अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। वह बेहतर रोजगार की तलाश में कुछ महीने पहले अपनी पत्नी के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे।
दीपक के परिवार में वृद्ध मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और चार महीने का मासूम बच्चा है। पिता का पहले ही निधन हो चुका था। ऐसे में पूरे परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। इस घटना ने परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों स्तर पर बड़ा झटका दिया।
मुख्य बातें
- कुलगाम में आतंकी हमले में छत्तीसगढ़ के मजदूर की मौत।
- मृतक की पहचान सक्ती जिले के दीपक रात्रे के रूप में हुई।
- परिवार में वृद्ध मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और शिशु शामिल।
- प्रशासन पार्थिव शरीर को गांव लाने की प्रक्रिया में जुटा।
- मुख्यमंत्री ने हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।
दीपक रात्रे की मौत के बाद प्रशासन हुआ सक्रिय
घटना की सूचना मिलते ही सक्ती पुलिस और जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। अधिकारियों ने देर रात परिजनों को घटना की जानकारी दी। साथ ही पार्थिव शरीर को छत्तीसगढ़ लाने के लिए आवश्यक समन्वय शुरू किया गया।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पीड़ित परिवार के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी सहयोग की मांग उठाई है। प्रशासन लगातार जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है।
दीपक रात्रे की मौत पर मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आतंकी हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायरतापूर्ण घटना बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पीड़ित परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। अधिकारियों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि परिवार को हरसंभव प्रशासनिक और मानवीय सहयोग दिया जाएगा। दीपक रात्रे की मौत पर प्रदेशभर से शोक संदेश सामने आ रहे हैं।
घटना से जुड़े अहम तथ्य
- घटना कुलगाम जिले के केलम क्षेत्र में हुई।
- दीपक ईंट भट्टे पर मजदूरी करने गए थे।
- परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन्हीं पर थी।
- पार्थिव शरीर को सक्ती लाने की तैयारी जारी।
- सरकार ने सहायता का आश्वासन दिया।

