कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए ऐतिहासिक पल आया। हर्ष सिंह ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुष जूडो स्पर्धा में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए।
इस जीत ने भारतीय जूडो को नई पहचान दी। साथ ही युवा खिलाड़ियों के लिए यह उपलब्धि प्रेरणा बन गई। वर्षों की मेहनत और अनुशासन का परिणाम आखिरकार ग्लास्गो में दिखाई दिया।
बचपन के सपने से विश्व मंच तक का सफर
बचपन से ही हर्ष सिंह का लक्ष्य जूडो में देश का नाम रोशन करना था। जब दूसरे बच्चे सामान्य खेलों में व्यस्त रहते थे, तब वह घंटों मैट पर अभ्यास करते थे।
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में जगह मिली। यहीं से उनका अंतरराष्ट्रीय करियर नई दिशा में आगे बढ़ा।
अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने दिलाई बड़ी सफलता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता आसान नहीं होती। हर्ष सिंह ने इंटरनेशनल जूडो फेडरेशन (IJF) के कई बड़े टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया। उन्होंने टोक्यो ग्रैंड स्लैम, ताशकंद ग्रैंड स्लैम और एशियन चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
लगातार हार और जीत के अनुभव ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाया। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
फाइनल मुकाबले में दिखाई चैंपियन वाली मानसिकता
स्वर्ण पदक मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष वरीय खिलाड़ी जोशुआ काट्ज उनके सामने थे। मुकाबला बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। हालांकि अंतिम क्षणों में भारतीय खिलाड़ी ने शानदार तकनीक का प्रदर्शन किया।
वाजा-आरी अंक के साथ उन्होंने निर्णायक बढ़त बनाई और मुकाबला जीत लिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ हर्ष सिंह भारतीय खेल इतिहास के स्वर्णिम अध्याय का हिस्सा बन गए।
भारतीय जूडो के लिए नई शुरुआत
हर्ष की जीत से कुछ घंटे पहले अस्मिता डे ने भी महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता था। पहली बार भारत ने एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में दो स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड बनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सहित कई प्रमुख हस्तियों ने खिलाड़ियों को बधाई दी। यह सफलता आने वाले वर्षों में भारतीय जूडो को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने हर्ष सिंह
23 वर्ष की उम्र में हर्ष सिंह ने वह उपलब्धि हासिल कर ली, जिसका भारतीय जूडो लंबे समय से इंतजार कर रहा था। उनकी कहानी बताती है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
यह स्वर्ण पदक केवल एक मेडल नहीं है। यह भारतीय जूडो के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव भी है।
प्रमुख उपलब्धियां
- पुरुष 60 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक।
- जूडो के पुरुष वर्ग में पहला भारतीय कॉमनवेल्थ गोल्ड।
- कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत का प्रतिनिधित्व।
- भारतीय जूडो के नए स्टार के रूप में उभरे।
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