दिल्ली की अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और सह-आरोपी विनोद तोमर को आरोपों से बरी कर दिया है। बृजभूषण कोर्ट फैसला ऐसे मामले में आया है, जिसने पिछले तीन वर्षों तक खेल, राजनीति और न्यायिक व्यवस्था को चर्चा के केंद्र में रखा। अप्रैल 2023 में शुरू हुआ पहलवानों का आंदोलन अब अदालत के निर्णय के साथ नए मोड़ पर पहुंच गया है।
बृजभूषण कोर्ट फैसला से पहले कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
अप्रैल 2023 में कई महिला पहलवान जंतर-मंतर पर धरने पर बैठीं। उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ के तत्कालीन अध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। आंदोलन में विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया प्रमुख चेहरे बने।
धरने ने जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का रूप ले लिया। विपक्षी दलों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के निर्देश पर दिल्ली पुलिस ने दो एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच और अदालत की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी
दिल्ली पुलिस ने जून 2023 में छह महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया। वहीं नाबालिग पहलवान से जुड़े मामले में बयान बदलने के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई।
मई 2024 में अदालत ने आरोप तय किए। इसके बाद शिकायतकर्ताओं और गवाहों के बयान दर्ज हुए। बचाव पक्ष ने बयानों में विरोधाभास और साक्ष्यों की कमी का तर्क रखा। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को बरी कर दिया।
मुख्य अपडेट
- महिला पहलवानों ने अप्रैल 2023 में आंदोलन शुरू किया।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एफआईआर दर्ज हुई।
- दिल्ली पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया।
- अदालत में लगभग तीन वर्षों तक सुनवाई चली।
- अगस्त 2026 में दोनों आरोपियों को बरी कर दिया गया।
बृजभूषण कोर्ट फैसला के दौरान कई बड़े बदलाव हुए
इस विवाद के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ में नेतृत्व बदला। बाद में खेल मंत्रालय ने नए महासंघ को भी निलंबित कर दिया। वहीं कई प्रमुख खिलाड़ियों के करियर की दिशा भी बदल गई।
साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा की। बजरंग पुनिया ने पद्मश्री सम्मान लौटाया और बाद में राजनीति में सक्रिय हुए। विनेश फोगाट ने भी राजनीति में प्रवेश किया और हरियाणा विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनीं।
राजनीतिक स्तर पर भी बदलाव हुआ। भाजपा ने कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण शरण सिंह की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया।
फैसले के बाद आगे की स्थिति
बृजभूषण कोर्ट फैसला आने के बाद कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। हालांकि शिकायतकर्ता पक्ष ने उच्च अदालत में फैसले को चुनौती देने की बात कही है। ऐसे में इस मामले की कानूनी यात्रा पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
यह विवाद महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा, खेल संघों की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया पर देशव्यापी चर्चा का कारण बना। आने वाले समय में उच्च न्यायालय में होने वाली संभावित सुनवाई पर भी सभी की नजर रहेगी।
प्रमुख घटनाक्रम
- 23 अप्रैल 2023: जंतर-मंतर पर धरना शुरू।
- 28 अप्रैल 2023: दो एफआईआर दर्ज हुईं।
- 15 जून 2023: पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया।
- 21 मई 2024: अदालत ने आरोप तय किए।
- 3 अगस्त 2026: बृजभूषण कोर्ट फैसला आया और दोनों आरोपी बरी हुए।

