संविधान हत्या दिवस के मौके पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए 1975 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का सबसे कठिन दौर बताया। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में उन्होंने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने उस समय लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। कंगना का यह बयान सामने आते ही संविधान हत्या दिवस एक बार फिर चर्चा का केंद्र बन गया।
इमरजेंसी को बताया संविधान पर हमला
अपने पोस्ट में कंगना रनौत ने कहा कि इमरजेंसी केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं था, बल्कि यह देश के संविधान और नागरिक स्वतंत्रताओं पर सीधा प्रहार था। उन्होंने कहा कि उस समय अभिव्यक्ति की आजादी सीमित कर दी गई थी और कई राजनीतिक नेताओं तथा पत्रकारों को जेल भेजा गया था। कंगना के अनुसार, संविधान हत्या दिवस हमें उस दौर की याद दिलाता है जब लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
फिल्म ‘इमरजेंसी’ से साझा किया बीटीएस वीडियो
संविधान हत्या दिवस के अवसर पर कंगना ने अपनी फिल्म ‘इमरजेंसी’ का बिहाइंड द सीन्स वीडियो भी शेयर किया। वीडियो में फिल्म की शूटिंग और निर्माण से जुड़े कुछ खास पल दिखाई दिए। अभिनेत्री ने बताया कि इस विषय पर फिल्म बनाना उनके लिए एक जिम्मेदारी और सीखने का अवसर दोनों था।
लोकतांत्रिक मूल्यों को याद रखने की जरूरत
कंगना का मानना है कि इतिहास की घटनाओं को याद रखना जरूरी है ताकि भविष्य में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि संविधान हत्या दिवस केवल अतीत को याद करने का दिन नहीं, बल्कि लोकतंत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करने का अवसर भी है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
कंगना रनौत के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने उनके विचारों का समर्थन किया, जबकि कुछ ने राजनीतिक दृष्टिकोण से अलग राय रखी। हालांकि, संविधान हत्या दिवस को लेकर उनकी पोस्ट ने एक बार फिर इमरजेंसी काल की बहस को चर्चा में ला दिया।
फिल्मी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर सक्रिय कंगना
कंगना रनौत पिछले कुछ समय से फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी फिल्म ‘इमरजेंसी’ भले ही बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी, लेकिन संविधान हत्या दिवस के मौके पर उससे जुड़ा वीडियो साझा कर उन्होंने फिर से उस विषय को लोगों के सामने रखा।
निष्कर्ष
संविधान हत्या दिवस पर कंगना रनौत का संदेश लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों की अहमियत को रेखांकित करता है। उनका मानना है कि इतिहास से सीख लेकर ही देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत बनाया जा सकता है।

