पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा विवाद अब पार्टी के बैंक खातों तक पहुंच गया है। TMC बैंक फंड विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये के संचालन को लेकर दो गुटों के बीच टकराव सामने आया। मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है।
हाईकोर्ट पहुंचा ममता बनर्जी का खेमा
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। अदालत में वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जल्द सुनवाई का आग्रह किया। हालांकि न्यायालय ने पहले पुलिस, राज्य सरकार और संबंधित बैंक को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। TMC बैंक फंड विवाद की सुनवाई नोटिस प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे बढ़ेगी।
नेतृत्व विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आए। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय के नेतृत्व वाले गुट ने संगठन और पार्टी फंड पर अपना दावा पेश किया, जबकि ममता बनर्जी का गुट बैंक खातों के संचालन का वैध अधिकार अपने पास होने की बात कह रहा है। इसी कारण वित्तीय नियंत्रण का मुद्दा विवाद का केंद्र बन गया।
बैंक खातों से लेन-देन पर फिलहाल रोक
दूसरे गुट की शिकायत के बाद पुलिस ने संबंधित बैंक को निर्देश दिया कि विवादित खातों से किसी भी तरह का लेन-देन न होने दिया जाए। साथ ही खातों से जुड़े दस्तावेज भी मांगे गए। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर की गई। TMC बैंक फंड विवाद में अब कोर्ट पुलिस की कार्रवाई की वैधता की भी जांच करेगा।
किन खातों में जमा हैं 440 करोड़ रुपये?
जानकारी के अनुसार, विवादित तीन खातों में लगभग 440 करोड़ रुपये जमा हैं। इनमें करीब 260 करोड़ रुपये तृणमूल कांग्रेस के मुख्य खाते में रखे गए हैं, जबकि लगभग 180 करोड़ रुपये गोवा और त्रिपुरा इकाइयों के खातों में मौजूद हैं। फिलहाल इन सभी खातों पर लेन-देन रोक दिया गया है।
फैसले का राजनीतिक असर भी होगा
विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का फैसला केवल बैंक खातों तक सीमित नहीं रहेगा। TMC बैंक फंड विवाद का निर्णय यह भी तय कर सकता है कि पार्टी के वित्तीय अधिकारों का वास्तविक नियंत्रण किस गुट के पास रहेगा। इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति और तृणमूल कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे पर भी पड़ सकता है।

