छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण पर मुख्यमंत्री साय का जोर

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सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं रामवनगमन पर्यटन परिपथ से जुड़े रामगढ़ में आयोजित दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव का विधिवत समापन हो गया। इस राजकीय आयोजन के समापन सत्र में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। राज्य सरकार छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण और संवर्धन के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है।

प्राचीनतम नाट्यशाला सीताबेंगरा की स्थापत्य समीक्षा

मुख्यमंत्री ने विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के रूप में चिन्हित सीताबेंगरा गुफा का सघन अवलोकन किया। दरअसल, पुरातात्विक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को इस 44 फीट लंबी गुफा की स्थापत्य और ऐतिहासिक विशेषताओं से अवगत कराया।

सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सहेजना अनिवार्य

इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण हमारी ऐतिहासिक अस्मिता और सांस्कृतिक गौरव की अमूल्य निधि है। इसलिए इसका संरक्षण और संवर्धन हमारी सामूहिक एवं शासकीय जिम्मेदारी है।

पुरातात्विक संपदा से समृद्ध छत्तीसगढ़

वहीं, उन्होंने रेखांकित किया कि छत्तीसगढ़ की धरती केवल प्राकृतिक संपदा से ही समृद्ध नहीं है, बल्कि इसकी पुरातात्विक विरासत भी वैश्विक स्तर पर विशिष्ट स्थान रखती है। नतीजतन, राज्य सरकार इन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित कर रही है।

पर्यटन विकास से आजीविका के अवसरों का सृजन

दरअसल, इस नीति का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को राज्य की समृद्ध संस्कृति से परिचित कराना है। इसके अलावा, इससे स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर प्राप्त होंगे।

जोगीमारा गुफा के प्राचीन शिलालेखों का प्रशासनिक निरीक्षण

इसी बीच, मुख्यमंत्री ने जोगीमारा गुफा में संरक्षित तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के प्राचीन शिलालेखों तथा दुर्लभ भित्तिचित्रों का निरीक्षण किया। इसके अलावा उन्होंने हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग की भूगर्भीय संरचना की भी जानकारी ली।

महाकवि कालिदास की साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण रखने का प्रयास

उल्लेखनीय है कि रामगढ़ पर्वत का संबंध महाकवि कालिदास की कालजयी कृति ‘मेघदूतम्’ की रचना स्थली से जोड़ा जाता है। इसलिए इस साहित्यिक स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आषाढ़ के प्रथम दिवस पर इस राजकीय महोत्सव का आयोजन सुनिश्चित किया जाता है।

हाथीपोल प्राकृतिक सुरंग का भूगर्भीय महत्व

दरअसल, लगभग 180 फीट लंबी तथा 15 से 20 फीट ऊंची यह प्राकृतिक सुरंग जल प्रवाह के कारण निर्मित हुई है। वहीं, इसके दूसरे छोर पर स्थित गुफाएं इस संपूर्ण परिक्षेत्र को ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं।

रामायणकालीन परंपराओं से जुड़ाव और धार्मिक पर्यटन

खसतौर पर, रामगढ़ पर्वत की इन गुफाओं का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी संबद्ध है। कुल मिलाकर, यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण है, जिसके लिए छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण योजना के तहत विशेष बजट आवंटित किया गया है।

वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस समापन समारोह में गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराते हुए कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम एवं पर्यटन व संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने भी विभागीय योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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