शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा पर तीखा हमला बोला। BJP दलबदल राजनीति को लेकर उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी लगातार विपक्षी दलों को कमजोर करने और नेताओं को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है।
राउत ने कहा कि राजनीतिक दलों को विभाजित करना भाजपा की रणनीति का हिस्सा बन गया है और यही उसकी कार्यशैली को दर्शाता है।
मुख्य बातें
- संजय राउत ने भाजपा पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया।
- BJP दलबदल राजनीति को लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक बताया।
- सत्ता जाने पर भाजपा के बिखरने का दावा किया।
- सचिन अहीर पर पार्टी छोड़ने को लेकर निशाना साधा।
- राजनीति में वफादारी और ईमानदारी पर भी टिप्पणी की।
‘सत्ता रहेगी तो साथ रहेंगे, नहीं तो बिखर जाएंगे’
राउत ने दावा किया कि भाजपा की मजबूती केवल सत्ता तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी सत्ता से बाहर हो जाती है तो उसके भीतर भी विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।
BJP दलबदल राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दूसरे दलों में टूट कराने वाली पार्टी खुद भी भविष्य में इसी स्थिति का सामना कर सकती है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और भाजपा की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
विपक्षी दलों को कमजोर करने का लगाया आरोप
संजय राउत ने कहा कि भाजपा का पूरा ध्यान विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने और उनके संगठन को कमजोर करने पर है। उनके अनुसार, यह स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा विचारों के आधार पर होनी चाहिए, न कि दलों को तोड़ने की कोशिश के जरिए।
सचिन अहीर पर क्यों बरसे राउत?
BJP दलबदल राजनीति पर टिप्पणी करते हुए राउत ने एमएलसी सचिन अहीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां दीं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने साथ छोड़ दिया।
राउत ने कहा कि अहीर को एमएलसी, पार्टी उपनेता और कामगार सेना के कार्यकारी अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद मिले थे। इसके बाद भी उनका फैसला कार्यकर्ताओं के लिए निराशाजनक रहा।
ईमानदारी और वफादारी पर दिया संदेश
संजय राउत ने कहा कि राजनीति में केवल पद प्राप्त करना ही महत्वपूर्ण नहीं होता। उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और वफादारी का भी बड़ा महत्व है।
उन्होंने दावा किया कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के कारण कई नेता अपने पुराने साथियों और विचारधारा से दूरी बना लेते हैं, जो लोकतांत्रिक राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
राजनीतिक बयान के क्या हैं मायने?
BJP दलबदल राजनीति को लेकर दिया गया यह बयान ऐसे समय में आया है, जब महाराष्ट्र में राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है तथा आने वाले दिनों में विभिन्न दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं।

