Agniveer Retention: अग्निपथ योजना बदलाव, सेना की नई मांग और कारण

CG DARSHAN
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भारतीय सेना में Agniveer Retention को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुआ पहला बैच इस वर्ष चार साल का कार्यकाल पूरा करेगा। इसी बीच सामने आई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि तीनों सेनाएं पहले से अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने के पक्ष में हैं। हालांकि इस पर अभी केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है।

सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि चार वर्षों में तैयार हुए प्रशिक्षित जवानों को पूरी तरह सेवा से मुक्त करना सेना के लिए चुनौती बन सकता है। यही वजह है कि अब रिटेंशन नीति की समीक्षा पर गंभीर चर्चा चल रही है।

क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?

अग्निपथ योजना का उद्देश्य सेना को युवा और तकनीक आधारित बनाना था। चार वर्षों के दौरान अग्निवीरों ने आधुनिक हथियारों, ड्रोन तकनीक, निगरानी प्रणाली और डिजिटल युद्ध प्रणाली का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने कई सैन्य अभ्यासों और परिचालन गतिविधियों में भी हिस्सा लिया।

अब सेना का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को लंबे समय तक सेवा में रखने से ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ नए सैनिकों के प्रशिक्षण पर होने वाला समय और खर्च भी कम होगा। यही कारण है कि Agniveer Retention बढ़ाने की मांग सामने आई है।

मुख्य अपडेट

  • पहला अग्निवीर बैच 2026 में कार्यकाल पूरा करेगा।
  • अभी केवल 25% अग्निवीरों को स्थायी सेवा मिल सकती है।
  • नौसेना 75% तक रिटेंशन बढ़ाने के पक्ष में बताई जा रही है।
  • सेना और वायुसेना करीब 50% तक रिटेंशन चाहती हैं।
  • अंतिम फैसला सरकार और रक्षा मंत्रालय को लेना है।

तीनों सेनाओं की जरूरतें क्यों अलग हैं?

भारतीय नौसेना आधुनिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और हाई-टेक उपकरणों का संचालन करती है। इन प्रणालियों के लिए लंबे समय तक प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होती है। इसलिए नौसेना सबसे अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने की मांग कर सकती है।

दूसरी ओर सेना और वायुसेना भी मौजूदा 25 प्रतिशत सीमा को बढ़ाने की वकालत कर रही हैं। हालांकि Agniveer Retention पर अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

क्या अभी नियम बदल गए हैं?

नहीं। फिलहाल मौजूदा नियम ही लागू हैं। चार साल की सेवा पूरी करने के बाद मेरिट, मेडिकल फिटनेस, अनुशासन और सेना की आवश्यकता के आधार पर अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों का चयन नियमित सेवा के लिए किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि पहले भी इस संबंध में प्रस्ताव भेजा गया था। अब पहले बैच के कार्यकाल पूरा होने के कारण इस विषय पर दोबारा विचार किया जा रहा है।

अग्निवीरों को सेवा पूरी होने के बाद क्या मिलेगा?

जो अग्निवीर नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं होंगे, उन्हें सेवा निधि पैकेज, कौशल प्रमाणपत्र और अनुभव प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इसके अलावा कई सरकारी और निजी संस्थानों में रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। पहले बैच को आयु सीमा में पांच वर्ष और बाद के बैचों को तीन वर्ष की छूट भी मिलेगी।

एक नजर में

  • सेवा निधि पैकेज मिलेगा।
  • स्किल और अनुभव प्रमाणपत्र दिए जाएंगे।
  • सीएपीएफ में 10 प्रतिशत आरक्षण।
  • आयु सीमा में विशेष छूट।
  • निजी और सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार सहायता।
  • ब्रिज कोर्स और उच्च शिक्षा के अवसर।

भविष्य में क्या हो सकता है?

यदि सरकार रिटेंशन प्रतिशत बढ़ाने का निर्णय लेती है तो सेना को पहले से अधिक अनुभवी सैनिक मिलेंगे। इससे नई भर्ती पर निर्भरता भी कम होगी। वहीं युवाओं के लिए स्थायी सैन्य सेवा का अवसर बढ़ सकता है।

हालांकि फिलहाल Agniveer Retention केवल चर्चा का विषय है। सरकार की मंजूरी के बाद ही किसी बड़े बदलाव की आधिकारिक घोषणा होगी।

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