राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर SIT रिपोर्ट, CCTV में 70 घटनाएं दर्ज

CG DARSHAN
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अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक की गई है। रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में पेश की गई, जिसमें गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और कथित गबन की घटनाओं की पुष्टि की गई है। जांच के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था में की गई ढिलाई ने आरोपियों के लिए चोरी करना आसान बना दिया।

SIT ने कहा है कि यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जिम्मेदारी, सुरक्षा खामियों और भविष्य के सुधारात्मक उपायों का विस्तृत विवरण शामिल किया जाएगा।

CCTV फुटेज में दर्ज हुईं 70 चोरी की घटनाएं

जांच टीम के अनुसार उपलब्ध CCTV फुटेज में गणना कर्मियों द्वारा करीब 70 बार नोटों की गड्डियां और खुले नोट छिपाने की घटनाएं दिखाई दी हैं। इससे राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच को महत्वपूर्ण आधार मिला है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 27 अप्रैल 2025 से पहले भी चोरी होने की आशंका है। हालांकि उस अवधि का CCTV रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण वास्तविक नुकसान का सटीक आकलन नहीं किया जा सका। इसके अलावा आरोपियों के बैंक खातों और उनके बयानों को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

एक नजर में

  • SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई।
  • CCTV में करीब 70 संदिग्ध चोरी की घटनाएं रिकॉर्ड मिलीं।
  • सुरक्षा नियमों में बदलाव को चोरी की बड़ी वजह माना गया।
  • कई अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में।
  • अंतिम रिपोर्ट में जवाबदेही और सुधारात्मक सुझाव शामिल होंगे।

सुरक्षा नियमों में बदलाव पर उठे सवाल

जांच के दौरान सामने आया कि 6 फरवरी 2025 को लागू नई SOP में कई सुरक्षा प्रावधानों को पहले की तुलना में कमजोर कर दिया गया था। कर्मचारियों की अनिवार्य तलाशी की व्यवस्था को नियमित या रैंडम जांच में बदल दिया गया।

इसके अलावा निर्धारित ड्रेस कोड, निजी सामान ले जाने पर रोक, हुंडीवार गणना और मूल्यवर्ग के अनुसार रिकॉर्ड रखने जैसे नियमों का भी पूरी तरह पालन नहीं हुआ। SIT ने इन खामियों को राम मंदिर चढ़ावा चोरी के प्रमुख कारणों में शामिल किया है।

अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

रिपोर्ट में ट्रस्ट प्रतिनिधि डॉ. अनिल मिश्रा पर प्रभावी निगरानी नहीं रखने का आरोप लगाया गया है। वहीं गणना कक्ष प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को सुरक्षा नियम लागू कराने में लापरवाही के लिए जिम्मेदार बताया गया है।

इसके अलावा रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट के मुताबिक उनके पास विभिन्न हुंडियों की चाबियां थीं, जबकि इसके लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं थी। साथ ही उन्होंने अपने रिश्तेदार को गणना कार्य में शामिल कराने की सिफारिश भी की थी।

रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल नगरकोटे का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे इस पहलू पर भी चर्चा जारी है।

बैंक और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल

SIT ने बैंक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की है। जांच के अनुसार कर्मचारियों को निर्धारित वेशभूषा उपलब्ध नहीं कराई गई और अधिकारियों के नियमित रोटेशन का भी पालन नहीं किया गया।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गणना कक्ष का CCTV बैकअप केवल 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता था, जबकि ऑडिट में 180 दिनों तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सिफारिश की गई थी। यदि समय पर निगरानी होती तो कई घटनाओं को रोका जा सकता था।

ट्रस्ट ने सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ट्रस्ट के अनुसार मामले की जानकारी मिलते ही उत्तर प्रदेश सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी, जिसके बाद उच्चस्तरीय SIT का गठन किया गया।

ट्रस्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए चढ़ावा प्रबंधन और वित्तीय निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

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