मानसून सत्र 2026 का पहला दिन राजनीतिक टकराव के नाम रहा। सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर जोरदार विरोध दर्ज कराया। लगातार हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में साढ़े 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि संसद में चर्चा तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने सभी दलों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन चलाने में सहयोग की अपील भी की।
लोकसभा में विधेयक पेश होने पर बढ़ा विरोध
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही समय बाद जजों की संख्या बढ़ाने से संबंधित विधेयक पेश किया गया। इसके बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने का आग्रह किया। हालांकि स्थिति सामान्य नहीं हुई और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
इस दौरान अध्यक्ष ने कई दिवंगत पूर्व सांसदों और अन्य प्रमुख हस्तियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इसके बाद सदन की नियमित कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।
मानसून सत्र 2026 में राज्यसभा की प्रमुख गतिविधियां
मानसून सत्र 2026 के पहले दिन राज्यसभा में सभापति सीपी राधाकृष्णन ने नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई। गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, मिजोरम और मेघालय से निर्वाचित सदस्य इस प्रक्रिया में शामिल हुए।
शपथ ग्रहण के बाद विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर विरोध जताया। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही भी निर्धारित समय तक नहीं चल सकी और उसे स्थगित करना पड़ा।
महुआ मोइत्रा और अन्य नेताओं के बयान
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी छोड़ने वाले सांसदों पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों की अयोग्यता संबंधी याचिकाएं लंबित हैं, उन्हें सर्वदलीय बैठक में बुलाना उचित नहीं था। उन्होंने सदन में बैठने की नई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।
वहीं, टीएमसी सांसद महुआ माझी ने कहा कि इंडिया ब्लॉक महिला आरक्षण या परिसीमन के विरोध में नहीं है। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावे से जुड़े कथित मामले पर भी चर्चा की मांग की।
एक नजर में
- दोनों सदनों की कार्यवाही दो बार स्थगित हुई।
- प्रधानमंत्री ने शांतिपूर्ण चर्चा का संदेश दिया।
- विपक्ष ने कई मुद्दों पर सरकार को घेरा।
- राज्यसभा में नए सदस्यों ने शपथ ली।
- लोकसभा में विधेयक पेश होने पर विवाद बढ़ा।
आगे की रणनीति पर रहेगी नजर
मानसून सत्र 2026 के पहले दिन का घटनाक्रम आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकता है। सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है। दूसरी ओर विपक्ष कई राजनीतिक और जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। इसलिए मानसून सत्र 2026 के आगामी दिन भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

