भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय कई विकल्पों पर काम कर रहा है। रूसी मिसाइल को Su-30 MKI लड़ाकू विमानों से जोड़ने का प्रस्ताव भी इसी योजना का हिस्सा है। इस प्रस्ताव पर डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल यानी DAC में चर्चा हो सकती है। मंजूरी मिलने पर वायु सेना की लंबी दूरी की हवाई क्षमता बढ़ सकती है।
क्या है पूरा रक्षा प्रस्ताव?
भारतीय वायु सेना के Su-30 MKI बेड़े को लगातार आधुनिक बनाया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के तहत रूसी मूल की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल को विमान के साथ एकीकृत करने का प्रस्ताव सामने आया है।
रूसी मिसाइल का इस्तेमाल लंबी दूरी से हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। इससे लड़ाकू विमानों को Beyond Visual Range यानी BVR अभियानों में अतिरिक्त क्षमता मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, किसी हथियार की वास्तविक क्षमता उसके संस्करण और विमान के साथ एकीकरण पर निर्भर करती है। इसलिए अंतिम परिचालन क्षमता परीक्षण और मंजूरी के बाद स्पष्ट होगी।
300 किलोमीटर तक बताई जाती है रेंज
रिपोर्टों के मुताबिक संबंधित मिसाइल की मारक दूरी करीब 300 किलोमीटर तक हो सकती है। इतनी लंबी दूरी का हथियार हवाई अभियानों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस तरह की क्षमता से लड़ाकू विमान दूर मौजूद हवाई लक्ष्यों पर कार्रवाई कर सकते हैं। इसके अलावा, निगरानी और कमांड से जुड़े महत्वपूर्ण विमान भी संभावित लक्ष्य हो सकते हैं।
हालांकि, अलग-अलग संस्करणों की क्षमता में अंतर हो सकता है। इसलिए मिसाइल की तकनीकी खूबियों को लेकर आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना जरूरी है।
रूसी मिसाइल से Su-30 MKI को मिलेगा फायदा
रूसी मिसाइल के संभावित एकीकरण से Su-30 MKI की लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ सकती है। इससे भारतीय वायु सेना के पास अलग-अलग परिस्थितियों में इस्तेमाल के लिए एक अतिरिक्त विकल्प होगा।
Su-30 MKI पहले से ही भारतीय वायु शक्ति का प्रमुख हिस्सा है। इसमें आधुनिक हथियार जोड़ने से इसके परिचालन उपयोग को और व्यापक बनाया जा सकता है।
Su-30 MKI का लगातार हो रहा आधुनिकीकरण
Su-30 MKI भारतीय वायु सेना के सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में शामिल है। इसकी बड़ी संख्या और लंबी दूरी की परिचालन क्षमता इसे अहम बनाती है।
वायु सेना इन विमानों के अपग्रेड पर लगातार काम कर रही है। एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों को आधुनिक बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसके साथ ही AL-31 इंजन के ओवरहॉल से संबंधित कार्य किए जा रहे हैं। इससे विमानों की परिचालन क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
भारत स्वदेशी विकल्प भी कर रहा मजबूत
भारत केवल विदेशी हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसी वजह से स्वदेशी एयर-टू-एयर मिसाइल कार्यक्रमों पर भी जोर दिया जा रहा है।
DRDO अस्त्र मिसाइल के नए संस्करणों को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। भविष्य में अधिक दूरी तक हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता विकसित करने की योजना है।
इससे भारतीय लड़ाकू विमानों के लिए स्वदेशी हथियार विकल्प बढ़ेंगे। साथ ही, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
मीटियर मिसाइल से भी बढ़ेगी हवाई क्षमता
भारत ने फ्रांस की मीटियर एयर-टू-एयर मिसाइलों को भी अपनी हवाई युद्ध क्षमता में शामिल किया है। यह आधुनिक BVR अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हथियार मानी जाती है।
इस तरह भारत अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त तकनीक और स्वदेशी विकास को साथ लेकर चल रहा है। इससे वायु सेना के पास विभिन्न परिस्थितियों के लिए कई हथियार विकल्प उपलब्ध होंगे।
एक नजर में
- Su-30 MKI भारतीय वायु सेना का प्रमुख लड़ाकू विमान है।
- रूसी मिसाइल के एकीकरण का प्रस्ताव विचाराधीन बताया गया है।
- इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर तक बताई जाती है।
- अस्त्र के नए संस्करणों से स्वदेशी क्षमता बढ़ाने पर जोर है।
- मीटियर मिसाइल भी लंबी दूरी की हवाई क्षमता में अहम है।
भारतीय वायु शक्ति के लिए क्यों अहम है यह कदम?
लंबी दूरी की हवाई मारक क्षमता आधुनिक युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रूसी मिसाइल को Su-30 MKI से जोड़ने की योजना इसी जरूरत से जुड़ी है।
वहीं, स्वदेशी अस्त्र कार्यक्रम और विदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल क्षमता का संतुलन बनाने में मदद कर सकता है। इससे भारतीय वायु सेना को अलग-अलग अभियानों के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे।
कुल मिलाकर, Su-30 MKI के आधुनिकीकरण और नए हथियारों के एकीकरण से भारतीय वायु शक्ति को मजबूती मिल सकती है। रूसी मिसाइल का संभावित इस्तेमाल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य बातें
- Su-30 MKI में नई लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल जोड़ने की योजना।
- प्रस्ताव पर DAC की बैठक में विचार किए जाने की संभावना।
- संबंधित मिसाइल की रेंज करीब 300 किलोमीटर तक बताई जाती है।
- भारत अस्त्र मिसाइल के नए संस्करणों पर भी काम कर रहा है।
- फ्रांस की मीटियर मिसाइल भी भारतीय वायु क्षमता को मजबूत करती है।यह भी पढ़ें:
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