ईरान-इस्राइल तनाव के 163 दिन: गाजा में गतिरोध, नई शर्तों से बढ़ी चिंता

CG DARSHAN
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ईरान-इस्राइल तनाव लगातार नए मोड़ ले रहा है। 163 दिन बीतने के बाद भी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। गाजा में युद्ध जारी है। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान नई शर्तों के साथ बातचीत कर रहा है। दूसरी ओर यमन में हूती हमलों ने क्षेत्रीय सुरक्षा की चिंता बढ़ा दी है। इन घटनाओं का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है।

ईरान-इस्राइल तनाव के बीच गाजा योजना पर क्यों बना विवाद?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के लिए 15 सूत्री योजना पेश की थी। इस योजना में हमास के निरस्त्रीकरण के बाद इस्राइली सेना की वापसी का प्रस्ताव रखा गया था।

हालांकि, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उनका कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह निरस्त्र नहीं होगा, तब तक सेना गाजा से पीछे नहीं हटेगी। वहीं, हमास मध्यस्थ देशों और अमेरिका से अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की मांग कर रहा है।

गाजा युद्ध में स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पा रहा?

अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस संघर्ष के बाद कई बार संघर्षविराम की कोशिश हुई। लेकिन अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो सका।

इस्राइल और हमास अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। इसलिए बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद समाधान की राह कठिन बनी हुई है।

ईरान-इस्राइल तनाव के दौरान होर्मुज पर क्या चल रही है बातचीत?

ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत जारी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जहाज तय मार्ग से गुजर सकेंगे। हालांकि, ईरान ने स्पष्ट किया है कि जलमार्ग पूरी तरह खोलने से पहले कई राजनीतिक और कानूनी मुद्दों का समाधान जरूरी है।

इसके अलावा ईरान उन देशों के जहाजों पर प्रतिबंध लगाने की संभावना भी देख रहा है, जिनसे उसे नुकसान पहुंचने का दावा है। यदि ऐसा होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

अमेरिका को चेतावनी और हूती हमलों से बढ़ा दबाव

ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अमेरिकी सैनिक उसकी सीमा में प्रवेश करता है, तो सेना उसका जवाब देगी। दूसरी ओर, यमन में हूती विद्रोहियों ने मोखा बंदरगाह और सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले का दावा किया है।

इन घटनाओं ने लाल सागर क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

मुख्य बातें

  • ट्रंप की गाजा योजना को इस्राइल ने खारिज किया।
  • गाजा में युद्धविराम पर सहमति नहीं बन सकी।
  • होर्मुज पर ईरान और ओमान की बातचीत जारी है।
  • हूती हमलों से यमन और लाल सागर में तनाव बढ़ा।
  • अमेरिका और ईरान के बीच सीधी वार्ता अभी भी बंद है।

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान-इस्राइल तनाव का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए, तो इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजार, तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर भी पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इस्राइल के फैसले इस संकट की दिशा तय करेंगे।

एक नजर में

  • संघर्ष को 163 दिन पूरे हो चुके हैं।
  • गाजा में स्थायी शांति अभी दूर है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर नई शर्तों पर चर्चा जारी है।
  • हूती हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौती बढ़ी।
  • ईरान-इस्राइल तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

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