कोरबा के गेवरा-दीपका क्षेत्रीय मुख्यालय में हिंद मजदूर सभा (HMS) से संबद्ध कोयला मजदूर पंचायत ने कोल इंडिया वेतन समझौता को समय पर लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन का कहना है कि 12वें JBCI का गठन जल्द नहीं हुआ तो लगभग 2.50 लाख कोयला श्रमिकों के वेतन और सेवा शर्तों पर असर पड़ सकता है।
मुख्य बातें
- गेवरा-दीपका मुख्यालय पर HMS का प्रदर्शन।
- 12वें JBCI के तत्काल गठन की मांग।
- 2.50 लाख श्रमिकों के वेतन समझौते का मुद्दा।
- देरी होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
- कार्य बहिष्कार तक की घोषणा का संकेत।
कोल इंडिया वेतन समझौता को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
सोमवार सुबह बड़ी संख्या में श्रमिक और यूनियन पदाधिकारी गेवरा-दीपका क्षेत्रीय मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने कोल इंडिया प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। इसके बाद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जल्द कार्रवाई की मांग की गई।
यूनियन ने कहा कि कोल इंडिया वेतन समझौता 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित है। इसके लिए जॉइंट बाइपार्टाइट कमेटी फॉर द कोल इंडस्ट्री (JBCI) का समय पर गठन आवश्यक है। यदि प्रक्रिया में देरी हुई तो वेतन समझौते के लागू होने में बाधा आ सकती है।
कोल इंडिया वेतन समझौता में JBCI की भूमिका क्या है?
यूनियन नेताओं के अनुसार JBCI कोल इंडिया और उसकी सभी अनुषंगी कंपनियों में श्रमिकों के हितों से जुड़े फैसले लेती है। कोल इंडिया वेतन समझौता के तहत वेतनमान, भत्ते, आवास, चिकित्सा सुविधा और अन्य सेवा शर्तों पर इसी समिति में चर्चा होती है।
यही कारण है कि श्रमिक संगठन समिति का गठन जल्द से जल्द करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समय पर प्रक्रिया शुरू होने से वेतन समझौते में पारदर्शिता बनी रहेगी।
वेतन समझौते में देरी से क्या होगा असर?
यूनियन का कहना है कि JBCI गठन में देरी का असर केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं रहेगा। इससे भत्तों, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य श्रमिक कल्याण योजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
साथ ही पूरे देश के कोयला क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के बीच असंतोष बढ़ने की संभावना है। इसलिए संगठन इस विषय को राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा मान रहा है।
एक नजर में
- 12वां वेतन समझौता 1 जुलाई 2026 से प्रस्तावित।
- चार केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर प्रदर्शन।
- देशभर में महाप्रबंधक कार्यालयों पर ध्यानाकर्षण कार्यक्रम।
- JBCI गठन को लेकर बढ़ा दबाव।
- श्रमिक हितों की सुरक्षा की मांग।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
ज्ञापन सौंपते समय यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि कोल इंडिया वेतन समझौता से जुड़े मुद्दे पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगा।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर कार्य बहिष्कार और राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा भी की जा सकती है। हालांकि, सोमवार का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद रही।
बड़ी संख्या में शामिल हुए श्रमिक
प्रदर्शन में रेशम लाल यादव, अनिरुद्ध सिंह, शिव शंकर पटेल, एस. सी. मंसूरी, मोहम्मद कलीम, एस. डी. मानिकपुरी, ओम प्रकाश, तरुण राहा, सृष्टिधर तिवारी, अमृतलाल चंद्र, एस. पी. तांती और रमेश मिश्रा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।
यूनियन ने दोहराया कि कोल इंडिया वेतन समझौता समय पर लागू कराने के लिए JBCI का गठन जल्द होना चाहिए। कुल मिलाकर, अब श्रमिकों की निगाहें कोल इंडिया प्रबंधन और सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।


