देशभर में बढ़ रहे ड्रग तस्करी मामले अब सुप्रीम कोर्ट की चिंता का विषय बन गए हैं। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। अदालत का मानना है कि जांच में देरी और अलग-अलग प्रक्रियाओं के कारण कई मामलों में न्याय प्रभावित होता है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए सभी जांच एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि प्रभावी व्यवस्था के बिना इस चुनौती से निपटना आसान नहीं होगा।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
- समयबद्ध जांच की मांग पर सुनवाई हुई।
- NDPS मामलों के लिए विशेष अदालतों का सुझाव।
- फोरेंसिक रिपोर्ट की तय समयसीमा की मांग।
- डिजिटल रिकॉर्डिंग और समान SOP पर जोर।
ड्रग तस्करी मामले में याचिका की प्रमुख मांगें
याचिका में कहा गया है कि NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामलों की जांच निर्धारित समय में पूरी होनी चाहिए। फोरेंसिक रिपोर्ट में होने वाली देरी को रोकने के लिए अनिवार्य समयसीमा तय करने का भी आग्रह किया गया है।
इसके अलावा तलाशी, जब्ती और सैंपलिंग की प्रक्रिया के लिए पूरे देश में एक समान मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP लागू करने की मांग रखी गई है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकती है।
ड्रग तस्करी मामले में विशेष अदालतों की जरूरत क्यों?
ड्रग तस्करी मामले की जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए विशेष अदालतों के गठन का सुझाव दिया गया है। याचिका में तलाशी और जब्ती की प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी तथा डिजिटल रिकॉर्डिंग की भी मांग शामिल है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि इससे सबूत सुरक्षित रहेंगे और जांच एजेंसियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी। साथ ही राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।
एक नजर में
- फोरेंसिक रिपोर्ट के लिए समयसीमा तय करने की मांग।
- विशेष NDPS अदालतों के गठन का प्रस्ताव।
- तलाशी और सैंपलिंग की समान SOP की मांग।
- विशेषज्ञ समिति बनाने का सुझाव।
- नशा पीड़ितों के पुनर्वास पर भी जोर।
विशेषज्ञ समिति और सख्त कार्रवाई का प्रस्ताव
याचिका में नए साइकोएक्टिव पदार्थों की पहचान और नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही संगठित ड्रग सिंडिकेट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनकी संपत्तियों के आकलन व जब्ती की मांग भी की गई है।
इसके अलावा नशे की लत से प्रभावित लोगों के लिए पुनर्वास और वेलनेस सेंटर स्थापित करने का सुझाव दिया गया है। याचिका में व्यक्तिगत इस्तेमाल और संगठित तस्करी से जुड़े आरोपियों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था की भी मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने लॉ कमीशन से इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराने का अनुरोध भी किया है। याचिका में दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में मादक पदार्थों से जुड़े अपराधों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ भी जब्त किए गए।
अब ड्रग तस्करी मामले में केंद्र सरकार के जवाब और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजर रहेगी। यदि अदालत याचिका की प्रमुख मांगों को स्वीकार करती है, तो देशभर में NDPS मामलों की जांच और सुनवाई की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।


