भारतीय मुक्केबाजी में छोटे लाल यादव ने प्रशिक्षक के रूप में खास पहचान बनाई है। उन्होंने मैरी कॉम समेत कई महिला मुक्केबाजों को प्रशिक्षण दिया। उनके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन किया। अब उनके कोचिंग योगदान को द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।
रिंग से कोचिंग तक पहुंचा सफर
यादव ने खिलाड़ी के तौर पर भी भारतीय मुक्केबाजी में पहचान बनाई। वह राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे। उनके खेल करियर में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का अनुभव शामिल रहा है। बाद में चोट के कारण उन्हें अपनी भूमिका बदलनी पड़ी।
इसके बाद उन्होंने प्रशिक्षण को अपना नया क्षेत्र बनाया। वर्ष 2014-15 में उन्होंने पटियाला के राष्ट्रीय खेल संस्थान से कोचिंग पाठ्यक्रम पूरा किया। इसके बाद मैरी कॉम के प्रशिक्षण की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिला।
छोटे लाल यादव की रणनीति ने बदली तैयारी
मैरी कॉम जैसी अनुभवी खिलाड़ी के साथ काम करना आसान नहीं था। यादव ने उनकी उम्र और शारीरिक जरूरतों को ध्यान में रखा। उन्होंने प्रशिक्षण में कार्यभार और तकनीक के बीच संतुलन बनाया।
उनका जोर केवल कड़ी ट्रेनिंग पर नहीं रहा। उन्होंने मुकाबले की रणनीति और फिटनेस पर भी ध्यान दिया। वीडियो विश्लेषण के जरिए प्रतिद्वंद्वियों की कमजोरियों को समझा गया।
मैरी कॉम के साथ उनका लंबा जुड़ाव चर्चा में रहा है। 2018 में वह अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ के दो-सितारा प्रशिक्षक भी बने। उन्होंने इसके लिए निर्धारित प्रमाणन परीक्षा पास की थी।
महिला मुक्केबाजी में भी दिया योगदान
छोटे लाल यादव का अनुभव भारतीय महिला मुक्केबाजी टीम के लिए भी महत्वपूर्ण रहा। वह राष्ट्रीय प्रशिक्षण दल का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने मैरी कॉम के अलावा अन्य महिला मुक्केबाजों की तैयारी में योगदान दिया।
जैस्मीन लैंबोरिया के प्रशिक्षण में भी उनकी भूमिका का उल्लेख सामने आया है। उनकी प्रशिक्षण योजना में ताकत, कार्डियो और स्पैरिंग को अलग-अलग महत्व दिया गया। अलग-अलग शैली के मुक्केबाजों के साथ अभ्यास कराया गया।
उपलब्धियों से मजबूत हुआ दावा
- राष्ट्रीय स्तर पर मुक्केबाजी का लंबा अनुभव।
- भारतीय महिला मुक्केबाजों के प्रशिक्षण से जुड़े रहे।
- मैरी कॉम के व्यक्तिगत प्रशिक्षक के रूप में काम किया।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर का कोचिंग प्रमाणन हासिल किया।
- द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए उनका नाम प्रस्तावित किया गया।
द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए नाम प्रस्तावित
बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया ने पहले भी छोटे लाल यादव का नाम द्रोणाचार्य पुरस्कार के लिए भेजा था। वर्ष 2020 में बीएफआई ने राष्ट्रीय महिला कोच मोहम्मद अली कमर के साथ उनका नाम तय किया था।
इस सम्मान के लिए उनके प्रशिक्षण योगदान को आधार बनाया गया। मैरी कॉम के साथ उनका काम भी उनकी उपलब्धियों में शामिल रहा। उनकी कोचिंग यात्रा भारतीय मुक्केबाजी के लिए अहम मानी जाती है।
अब ओलंपिक स्वर्ण पर नजर
यादव का लक्ष्य केवल सम्मान हासिल करना नहीं है। वह अपने प्रशिक्षित मुक्केबाजों को ओलंपिक स्तर पर सफल देखना चाहते हैं। उनका फोकस खिलाड़ियों की तकनीक और फिटनेस मजबूत करने पर है।
उनका मानना है कि हर मुक्केबाज की जरूरत अलग होती है। इसलिए प्रशिक्षण भी खिलाड़ी की क्षमता के अनुसार होना चाहिए। यही दृष्टिकोण उनके कोचिंग करियर की प्रमुख विशेषता रहा है।
आगे की राह में प्राथमिकताएं
- खिलाड़ियों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण।
- तकनीक और फिटनेस में लगातार सुधार।
- अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के लिए रणनीति तैयार करना।
- युवा मुक्केबाजों को उच्च स्तर के लिए तैयार करना।
- ओलंपिक पदक की दावेदारी मजबूत करना।
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