रायपुर में इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मेले का उद्घाटन किया। तीन दिवसीय आयोजन में 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी शामिल हुए। देशभर से आए उद्यमियों और निवेशकों ने हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पारंपरिक उद्योगों के साथ नई अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग और युवाओं के रोजगार पर भी ध्यान है।
नए उद्योगों के लिए तैयार हो रहा छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में खनिज, ऊर्जा और वन संपदा की उपलब्धता बड़ी ताकत है। इसके साथ पर्याप्त मानव संसाधन भी मौजूद हैं। राज्य की भौगोलिक स्थिति भी उद्योगों के लिए उपयोगी बताई गई है।
सरकार इन संसाधनों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर दे रही है। बेहतर अधोसंरचना और निवेश नीतियों को भी इसका आधार बनाया जा रहा है। इससे नए उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का प्रयास है।
औद्योगिक विकास में एमएसएमई की अहम भूमिका
औद्योगिक विकास में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। एमएसएमई स्थानीय स्तर पर उद्यमिता और रोजगार बढ़ाते हैं। इससे आर्थिक गतिविधियों का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है।
लघु उद्योग भारती देश के 750 से अधिक जिलों में सक्रिय है। छत्तीसगढ़ के 25 जिलों में 1200 से अधिक उद्योग संगठन से जुड़े हैं। मेले में 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रहे हैं।
नई औद्योगिक नीति से निवेश को बढ़ावा
छत्तीसगढ़ सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 लागू की है। यह नीति उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से चर्चा के बाद तैयार की गई है। इसमें निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था पर जोर है।
नीति में प्रक्रियाओं को आसान बनाने के प्रावधान किए गए हैं। नए और उभरते क्षेत्रों के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था है। नीति लागू होने के बाद कई निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी दी गई।
कुछ परियोजनाओं पर जमीन पर काम भी शुरू होने की बात सामने आई है। इससे निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने पर जोर दिखाई देता है।
सेमीकंडक्टर से ग्रीन एनर्जी तक बढ़ा फोकस
छत्तीसगढ़ अब केवल कोयला, स्टील और सीमेंट तक सीमित नहीं रहना चाहता। आईटी, सेमीकंडक्टर, फार्मा और टेक्सटाइल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। ग्रीन एनर्जी को भी नए क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
प्रदेश में करीब 1100 करोड़ रुपये की सेमीकंडक्टर परियोजना पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई। नवा रायपुर को आधुनिक टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम जारी है।
टेक्नोलॉजी हब और इंडस्ट्री एक्सीलेंस हब विकसित करने की योजना भी सामने रखी गई है। इससे तकनीक आधारित उद्योगों के लिए नए अवसर तैयार हो सकते हैं।
खनिज, वन और ऊर्जा से मजबूत आधार
राज्य में कोयला, लौह अयस्क और बॉक्साइट जैसे खनिज उपलब्ध हैं। सरकार इन संसाधनों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन बढ़ाना चाहती है। इससे प्रसंस्करण आधारित उद्योगों की संभावनाएं बन सकती हैं।
छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत से अधिक भू-भाग वनाच्छादित बताया गया है। इमली, महुआ, चिरौंजी और हर्रा-बहेड़ा जैसी वनोपज उपलब्ध हैं। इनके वैज्ञानिक प्रसंस्करण से स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिल सकता है।
प्रदेश में करीब 30 हजार मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता भी बताई गई है। पर्याप्त बिजली और जल संसाधन उद्योगों के लिए उपयोगी आधार बन सकते हैं।
युवाओं के रोजगार से जुड़ेगा उद्योग विस्तार
औद्योगिक विकास का लाभ स्थानीय युवाओं तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया। नई औद्योगिक नीति में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता दी गई है। अधिक स्थानीय युवाओं को रोजगार देने वाले उद्योगों के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान है।
सरकार युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित नहीं रखना चाहती। कौशल, नवाचार और उद्यमिता के जरिए रोजगार देने की क्षमता बढ़ाने पर भी ध्यान है। एमएसएमई और स्टार्टअप इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बस्तर में पर्यटन निवेश की संभावनाएं
बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को भी निवेश से जोड़ा जा रहा है। यहां जलप्रपात, जंगल और जनजातीय संस्कृति पर्यटकों के लिए आकर्षण हैं। पर्यटन स्थानीय रोजगार का माध्यम बन सकता है।
होम-स्टे जैसी पहल से पर्यटन को स्थानीय परिवारों की आय से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने उद्यमियों से बस्तर के पर्यटन स्थलों को देखने का आग्रह किया।
इससे पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था के बीच बेहतर संबंध बनाने की संभावना है। उद्योगों के साथ पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश के अवसर तलाशे जा रहे हैं।
उद्योग और तकनीक का साझा मंच बना मेला
इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर केवल उत्पाद प्रदर्शित करने तक सीमित नहीं है। यह उद्यमियों के बीच संवाद का मंच भी है। यहां तकनीक, नवाचार और व्यावसायिक अनुभव साझा किए जा रहे हैं।
मेले में आयुर्वेदिक उत्पादों से लेकर आधुनिक मशीनरी तक प्रदर्शित की गई है। आईटी और नई तकनीक आधारित औद्योगिक उत्पाद भी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया।
उद्यमियों के साथ बातचीत में उनके उत्पादों और तकनीकों की जानकारी ली गई। आयोजन से नए कारोबारी संपर्क बनने की संभावना भी है।
निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर
औद्योगिक विकास के लिए निवेशकों को सरल प्रक्रिया उपलब्ध कराना जरूरी बताया गया। राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए प्रक्रियाएं आसान करने की बात कही है।
निवेशकों को भूमि, अधोसंरचना और जरूरी सुविधाएं समय पर देने पर भी जोर है। सरकार की भूमिका को सहयोगी और एक्सीलरेटर के रूप में विकसित करने की बात कही गई।
इससे उद्यमियों को प्रक्रियागत काम में कम समय लग सकता है। वे उत्पादन, नवाचार और रोजगार सृजन पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे।
मेले की प्रमुख विशेषताएं
- 18 से 20 सितंबर तक तीन दिवसीय आयोजन।
- देशभर के 300 से अधिक एमएसएमई उद्यमी शामिल।
- उत्पादों और नई तकनीकों का प्रदर्शन।
- उद्योगों के बीच संवाद और कारोबारी संपर्क का मंच।
निवेश और रोजगार की प्राथमिकताएं
- आईटी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर फोकस।
- फार्मा, टेक्सटाइल और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा।
- स्थानीय युवाओं के रोजगार पर विशेष ध्यान।
- स्थानीय संसाधनों के वैल्यू एडिशन पर जोर।
कुल मिलाकर, इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर-2026 में छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक दिशा सामने आई। औद्योगिक विकास को निवेश, तकनीक और रोजगार से जोड़ने पर जोर दिया गया। एमएसएमई और नए उद्योगों के विस्तार को भी महत्वपूर्ण माना गया।
राज्य में निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने और नए सेक्टर विकसित करने की दिशा में प्रयास जारी हैं। आने वाले समय में इन पहलों का असर परियोजनाओं और रोजगार के स्तर पर दिखाई दे सकता है।

