रायगढ़ में धान की फसल पर सूखे का खतरा, किसान पानी के इंतजार में

बारिश और सिंचाई की कमी से रायगढ़ में धान पर संकट

Cgdarshan
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छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में इस समय रायगढ़ धान संकट गहराता जा रहा है, क्योंकि खेतों में पानी की कमी से फसल मुरझाने लगी है। न तो आसमान से बरसात हो रही है और न ही नहर से पानी मिल पा रहा है, जिससे किसानों की उम्मीदें टूटने लगी हैं।

धान उत्पादन के लिए मशहूर इस इलाके में इस बार मौसम ने किसानों का साथ नहीं दिया। किसान बताते हैं कि वे कई बार प्रशासन से पानी उपलब्ध कराने की गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। खेतों में लगी फसल अब सूखने के कगार पर है और यदि जल्द ही पानी नहीं मिला तो भारी नुकसान होना तय है।

मिडमिडा गांव के किसानों ने केलो परियोजना अधिकारियों को लिखित शिकायत देकर तत्काल पानी छोड़ने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि ठेंगापाली के अंतर्गत आने वाले कई गांव अब तक नहर के पानी से वंचित हैं। भले ही नहर का निर्माण भाठानपाली तक हो चुका है, लेकिन उनके खेतों तक पानी नहीं पहुंचता।

गांव के किसान आनंद बारिक ने बताया कि ठेंगापाली शाखा से जुड़े 8-10 गांवों में पानी बेहद कम छोड़ा जाता है और ऊपर के गांवों में नहर को अवरुद्ध कर दिया जाता है, जिससे नीचे के खेतों तक पानी नहीं आता।

युवा किसान श्रीकांत का कहना है कि गांव में मात्र 4 बोरवेल हैं, जिनमें से एक खराब हो चुका है। इसके अलावा सुबह 5 बजे से 11 बजे तक बिजली कटौती होने से सिंचाई और मुश्किल हो गई है।

केलो परियोजना वर्ष 2007 में शुरू हुई थी, जिसमें 16 किलोमीटर मुख्य नहर और 74 किलोमीटर शाखा नहर का निर्माण होना था। इस परियोजना का उद्देश्य रायगढ़ के 167 और सक्ति जिले के 8 गांवों तक पानी पहुंचाना था। लेकिन 15 साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद कई गांव आज भी इसका लाभ नहीं ले पाए हैं।

केलो परियोजना की SDO रितु टंक ने जानकारी दी कि 5 अगस्त से नहर में पानी छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि कुछ स्थानों पर किसानों द्वारा अवरोध डालने से पानी आगे नहीं पहुंच पाया था, लेकिन अब अवरोध हटा दिया गया है और अगले दो दिनों में मिडमिडा, झलमला, भाठनपाली और नेतनागर तक पानी पहुंच जाएगा।

हालांकि किसान अब भी चिंतित हैं कि कहीं देर हो जाने से उनकी मेहनत की पूरी फसल बर्बाद न हो जाए।

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