पूर्व पीएम को फांसी की सजा—छात्र हत्याकांड में बड़े आरोप साबित

शेख हसीना को फांसी की सजा: पांच गंभीर आरोपों ने बदल दिया बांग्लादेश का राजनीतिक समीकरण

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बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को छात्र आंदोलनकारियों की हत्या और मानवता के खिलाफ गंभीर अपराधों में दोषी ठहराकर फांसी की सजा सुनाई। यह फैसला न केवल देश के भीतर बड़ी हलचल पैदा कर रहा है बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय बना हुआ है।

जुलाई 2023 में छात्र आंदोलन पर कार्रवाई को लेकर लंबे समय से आरोपों का सामना कर रही हसीना और उनकी टीम पर अदालत ने बेहद कठोर रुख अपनाया। फैसले के बाद बांग्लादेश के कई हिस्सों में तनाव बढ़ गया है और सुरक्षा व्यवस्था को सख्त कर दिया गया है। अवामी लीग ने देशव्यापी बंद की घोषणा की है।


वे पांच आरोप, जो साबित हुए

1. हत्या और अमानवीय हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप

मामले में अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि शेख हसीना और शीर्ष अधिकारियों ने नागरिकों के ख़िलाफ़ अवामी लीग और सुरक्षा बलों द्वारा की गई हिंसा को प्रोत्साहित किया और उसे रोकने में असफल रहीं। यह अपराध मानवता के खिलाफ माना गया।

2. छात्रों पर जानलेवा हमले का आदेश

कथित रूप से हसीना ने हेलीकॉप्टर, ड्रोन और घातक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों पर कार्रवाई के आदेश दिए। शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों पर इन आदेशों पर अमल करवाने का आरोप सिद्ध हुआ।

3. अबू सईद की हत्या

बेगम रोकैया विश्वविद्यालय के पास हुए हिंसक घटनाओं में छात्र अबू सईद की हत्या के आरोप में भी हसीना को दोषी पाया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उन्होंने भड़काऊ बयान देकर छात्रों पर घातक कार्रवाई की अनुमति दी थी।

4. चंखरपुल में छह निहत्थे छात्रों की हत्या

पिछले साल 5 अगस्त की घटना को लेकर न्यायाधिकरण ने माना कि यह हत्या हसीना और अन्य अधिकारियों की साजिश, उकसावे और आदेश के तहत की गई थी।

5. अशुलिया में छह छात्रों की हत्या और जलाना

यह घटना मामले का सबसे दर्दनाक हिस्सा थी। आरोप साबित हुए कि छह छात्र प्रदर्शनकारियों को गोली मारी गई, जिनमें से पांच के शवों को जला दिया गया, जबकि एक छात्र को जिंदा आग लगाने का आरोप भी सिद्ध हुआ।


फैसले के बाद हसीना के पास क्या विकल्प हैं?

  • हाई कोर्ट में सजा के खिलाफ अपील

  • अंतरराष्ट्रीय अदालतों में हस्तक्षेप की मांग

  • राजनीतिक समर्थन जुटाने के प्रयास

  • राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर करना

यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में बांग्लादेश का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।

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