माओवादी संगठन का बड़ा कदम: तीन राज्यों से एंटी-नक्सल ऑपरेशन रोकने की अपील, नक्सली सप्ताह रद्द

एंटी-नक्सल ऑपरेशन रोकने की मांग पर माओवादी संगठन का पत्र, इस बार नहीं मनाया जाएगा नक्सली सप्ताह

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छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश में नक्सल मोर्चे पर एक अप्रत्याशित और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। माओवादी संगठन एमएमसी स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता अनंत ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को एक आधिकारिक पत्र भेजकर एंटी-नक्सल अभियानों को अस्थायी रूप से रोकने की अपील की है।

पत्र में संगठन ने इस वर्ष ‘नक्सली सप्ताह (PLGA Week)’ रद्द करने की घोषणा करते हुए कहा है कि वे अब सरकार की पुनर्वास और पुनर्निर्माण योजनाओं की ओर कदम बढ़ाने को तैयार हैं।


माओवादी संगठन ने हथियार छोड़ने के संकेत दिए

प्रवक्ता अनंत के अनुसार, पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड सोनू दादा ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी विराम देने का प्रस्ताव रखा था, जिसे संगठन के प्रमुख सदस्य—जिसमें सतीश दादा और चंद्रत्ना शामिल हैं—ने भी समर्थन दिया है।

यह पहली बार है जब एमएमसी जोनल कमिटी ने खुलकर कहा है कि वे हथियार छोड़कर शांतिपूर्ण मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं।


तक का समय देने का अनुरोध

पत्र में तीनों राज्य सरकारों से अनुरोध किया गया है कि उन्हें 15 फरवरी 2026 तक का समय दिया जाए ताकि संगठन शांतिपूर्ण पुनर्वास प्रक्रिया में आगे बढ़ सके।

सरकार द्वारा माओवाद समाप्ति के लिए तय अंतिम सीमा 31 मार्च 2026 है, इसलिए माओवादी संगठन ने खुद को इसी दायरे के भीतर रखने का आश्वासन दिया है।


नक्सली सप्ताह नहीं मनाने की घोषणा

संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस दौरान सभी नक्सली गतिविधियां पूर्ण विराम पर रहेंगी।

  • पीएलजीए सप्ताह आयोजित नहीं होगा

  • किसी भी प्रकार की आंदोलनकारी कार्रवाई नहीं की जाएगी

  • संगठन के भीतर संचालन गतिविधियों को न्यूनतम रखा जाएगा

बदले में माओवादी प्रवक्ता ने सरकारों से आग्रह किया है कि वे भी सुरक्षा अभियान, मुखबिरी नेटवर्क और खोजी ऑपरेशन को रोकें, जिससे विश्वास बनाने का माहौल तैयार हो सके।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम दो संभावनाएं इंगित करता है—

  1. सरकारी रणनीतियों की सफलता, या

  2. माओवादी संगठन की रणनीतिक पुनर्संरचना

हालांकि यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसकी संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए।

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