संसद के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को चुनाव सुधारों पर चर्चा के दौरान माहौल तब गरमा गया जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। राहुल गांधी ने कहा कि चुनाव आयोग सहित कई संवैधानिक संस्थाओं पर एक विशेष विचारधारा का कब्जा कराया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक ढाँचे को धीरे-धीरे कमजोर किया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है, और इसमें सरकारी संरक्षण का संकेत स्पष्ट दिखाई देता है। राहुल गांधी के अनुसार—
🔸 CBI, ED से लेकर विश्वविद्यालयों तक नियुक्तियाँ योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि संघ से नजदीकी के आधार पर हो रही हैं।
🔸 चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव कर सुप्रीम कोर्ट के CJI को बाहर कर दिया गया।
🔸 CCTV फुटेज और डेटा से संबंधित नियम 2024 लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह बदले गए, जिससे पारदर्शिता घटे और नियंत्रण बढ़े।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार की वोटर लिस्ट में डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ और संदिग्ध फ़ोटोज़ पाए गए हैं, जो वोट चोरी की ओर संकेत करते हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ डेटा की गड़बड़ी नहीं बल्कि “लोकतांत्रिक अधिकारों की चोरी” है।
राहुल गांधी ने सदन में स्पष्ट चेतावनी दी —
“हम लोकतंत्र हैं, और लोकतंत्र तभी सुरक्षित है जब चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों। चुनाव आयोग को किसी भी सरकार या समूह के नियंत्रण में नहीं होना चाहिए। चुनाव सुधारों में देरी देश के भविष्य को जोखिम में डाल सकती है।”
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि:
✔ मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट सभी पार्टियों को चुनाव से एक माह पहले दी जाए
✔ CCTV फुटेज डिलीट करने का नियम रद्द किया जाए
✔ वोट चोरी और डेटा-छेड़छाड़ को गंभीर दंड की श्रेणी में शामिल किया जाए
अपनी बात समाप्त करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार चुनाव सुधारों में रुचि नहीं रखती क्योंकि पारदर्शी चुनाव उसकी राजनीतिक रणनीति के अनुकूल नहीं हैं।
